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इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ ने मनाया ‘विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस’, वेबिनार के जरिए नवाचारों पर हुई चर्चा

पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र एवं इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ द्वारा विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस पर गूगल मीट के माध्यम से वेबीनार का आयोजन किया

कानपुर देहात। पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र एवं इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ द्वारा विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस पर गूगल मीट के माध्यम से वेबीनार का आयोजन किया, जिसके मुख्य अतिथि डॉ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सीएसआईआर लखनऊ, कार्यक्रम के संरक्षक डॉ अनिल कुमार मिश्रा वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ, कार्यक्रम की संयोजक डॉक्टर अनामिका सिन्हा, कन्वीनर डॉक्टर विवेक सिंह, सह कन्वीनर डॉक्टर पर्वत सिंह रहे। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकृति का हम लगातार क्षरण कर रहे हैं उस प्रकृति में पाए जाने वाले असंख्य जीव प्राणियों के माध्यम से हमने अनेक खोजें की है, तथा अपने अनुकूल संसाधनों को बनाया है। डॉ मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में रचनात्मक विचारों को साकार करने और उन्हें नवाचार में परिवर्तित करने के अपार अवसर है, संयुक्त राष्ट्र ने मानव विकास के सभी पहलुओं में रचनात्मकता एवं नवाचार की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 21 अप्रैल को विश्व रचनात्मक और नवाचार दिवस के रूप में नामित किया है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर अनामिका सिन्हा ने बताया कि मस्तिष्क में जन्म लेने वाला विचार जिसको यदि हम सकारात्मक रूप में प्रयोग में लाते हैं तो वही नवाचार बन जाता है। टेक्नोलॉजी अपने आप में एक ऐसी विधा है जिसके माध्यम से हम अपने आवश्यकता अनुसार संसाधनों को बनाकर प्रयोग करते हैं। डॉ सिन्हा ने कहा कि इग्नू में शिक्षार्थियों द्वारा किए गए नवाचारों को समर्थन देने के लिए उपलब्ध अवसरों और इस क्षेत्र में दूरस्थ शिक्षा में नवाचार के लिए राष्ट्रीय केंद्र की भूमिका के बारे में यह वेबीनार आयोजित किया गया है। मुख्य वक्ता के तौर पर केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि व्याख्यानों को अधिक जानकारी पूर्ण, रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए विज्ञान कार्टूनों की एक अनूठी शैली का प्रयोग किया जाना चाहिए। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने दुनिया के अनेक छोटे से बड़े अविष्कार पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रकृति में पाए जाने वाले अनेक जीव जंतुओं से वैज्ञानिकों ने अनुसंधान करके तमाम ऐसे आविष्कार किए जो दुनिया के लिए एक मॉडल बनकर उभरे हैं ,जिसमें से प्रमुख रूप से उन्होंने कौवा, छिपकली, मेंढक, किंगफिशर, मधुमक्खी एवं रेंगने वाले कीड़ों का उदाहरण देते हुए, साइड मिरर, बुलेट ट्रेन, एरोप्लेन, एयरपोर्ट, वॉल प्रिंटिंग,फ्रिज एवं पानी को संरक्षित करने तथा ईंधन को बचाने आदि के सफल प्रयोग पर चर्चा की, जो विद्यार्थियों को शोध के क्षेत्र में बहुत उपयोगी और सार्थक होगा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ पर्वत सिंह ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि रचनात्मक विचार मानव प्रगति का आधार है इसलिए जन्म लेने वाले प्रत्येक विचार को हमें सकारात्मक रूप से प्रयोग करते हुए नित्य नए आयाम को स्थापित करना होगा। इस अवसर पर निदेशक डॉ रीना कुमारी, डॉ जयप्रकाश वर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ निशीथ नागर सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के समन्वयक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

anas quraishi
Author: anas quraishi

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