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गोपा अष्टमी पर्व पर पंडित राम कुमार द्विवेदी गौशाला रनिया में किया गया गायों का पूजन

कार्तिक मास की अष्टमी को मनाया जाने वाला गोपा अष्टमी पर्व सनातन धर्म में आस्था व विश्वास रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे लेकर नगर पंचायत रनियां स्थित पंडित रामकुमार द्विवेदी गौशाला में बड़ी धूमधाम से गायों का पूजन किया गया

Story Highlights
  • गौ सेवा से घरों में आती है सुख शांति-बाल जी शुक्ला भाजपा नेता 

सुशील त्रिवेदी, कानपुर देहात। कार्तिक मास की अष्टमी को मनाया जाने वाला गोपा अष्टमी पर्व सनातन धर्म में आस्था व विश्वास रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे लेकर नगर पंचायत रनियां स्थित पंडित रामकुमार द्विवेदी गौशाला में बड़ी धूमधाम से गायों का पूजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष बाल जी शुक्ला ने कहा कि आज के दिन गो पूजन को लेकर समाज में विशेष उत्साह रहता है और पूजन से घरों तथा जीवन में सुख शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को बताया कि गोपाष्टमी एक विशेष पर्व है जो भगवान श्रीकृष्ण के गोचारण लीला के आरंभ और गायों के प्रति सम्मान को समर्पित है। इस दिन गाय और बछड़ों की पूजा की जाती है, उन्हें सजाया जाता है, और चारा खिलाया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन गौ सेवा करने, गौशाला में दान देने और ग्वालों को उपहार देने को विशेष फलदायी माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा: यह दिन भगवान कृष्ण की पूजा का दिन है, और इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।

गौ सेवा: गोपाष्टमी का मुख्य अनुष्ठान गायों और बछड़ों की सेवा करना है। गायों को स्नान कराकर, हल्दी, कुमकुम और फूलों से सजाया जाता है।

दान-पुण्य: गायों को हरा चारा, गुड़ और अन्य भोजन खिलाया जाता है। गौशालाओं में दान देना और ग्वालों को वस्त्र या अन्य उपहार देना भी शुभ माना जाता है। गाय की एक परिक्रमा करने से पृथ्वी की परिक्रमा जितना पुण्य मिलता है, ऐसी मान्यता है। गोपाष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। इस दिन गौ सेवा करने से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। यह पर्व दया, करुणा और पशु संरक्षण का संदेश देता है। इस अवसर पर अंकित परमार, प्रियांशु शुक्ला, छोटे पाल एस के तिवारी आदि उपस्थित रहे।

anas quraishi
Author: anas quraishi

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