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6.33 लाख को कृमि मुक्ति की दवा खिलाने का अभियान शुरू 

जिले में बुधवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) पर महिला आयोग की सदस्य रंजना शुक्ला ने नगला जयसिंह विद्यालय में कृमि मुक्ति की दवा खाकर अभियान का शुभारंभ किया। यह दवा 1 वर्ष से 19 वर्ष उम्र तक के सभी लोगों को खानी है।

Story Highlights
  • आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों पर मना राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस
  • महिला आयोग की सदस्य ने दवा खाकर शुरू कराया कृमि मुक्ति अभियान 
  • नहीं खा पाएं कृमि मुक्ति की दवा तो मापअप राउंड में खा लें  
औरैया,अमन यात्रा :  जिले में बुधवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) पर महिला आयोग की सदस्य रंजना शुक्ला ने नगला जयसिंह विद्यालय में कृमि मुक्ति की दवा खाकर अभियान का शुभारंभ किया। यह दवा 1 वर्ष से 19 वर्ष उम्र तक के सभी लोगों को खानी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 6.33 लाख बच्चों और किशोरों को कृमि मुक्ति की दवा यानि पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू हुआ है। इस अभियान के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्वास्थ्य केन्द्रों और पंजीकृत स्कूलों, ईंट भट्ठों पर कार्य करने वाले श्रमिकों और घुमन्तू लोगों को दवा खिलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि किसी कारण आज जो बच्चे दवा नहीं खा पाए हैं उनको मॉपअप राउंड में खिलाई जाएगी। जनपद में मॉपअप राउंड 25 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। शिक्षक, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को यह दवा अपने सामने ही खिलाने के निर्देश हैं।
नोडल अधिकारी व एसीएमओ डाॅ शिशिर पुरी ने बताया कि कुछ खाकर ही यह दवा खानी है। 1 से 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा पीसकर पिलानी है जबकि 3 वर्ष से ऊपर के बच्चों को यह दवा चबाकर खानी है।  बुधवार को लगभग 80 प्रतिशत बच्चों ने दवा का सेवन किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन चतुर्वेदी ने बताया कि हम लोगों को दवा खिलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। हम सब कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दवा खिला रहे हैं। जो लोग दवा नहीं खा सके हैं, उनको मॉपअप राउंड में दवा खिलाने का प्रयास करेंगे।
लाभार्थी किरण पांडेय ने बताया कि मेरे बच्चे को आज उसके स्कूल में कृमि मुक्ति की दवा खिलाई गई है। दवा सेवन के दौरान और उसके बाद भी कोई दिक्कत नहीं हुई है।
क्यों खाएं दवा
डीसीपीएम अजय पांडेय ने बताया कि बच्चे अक्सर कुछ भी उठाकर मुंह में डाल लेते हैं या फिर नंगे पांव ही संक्रमित स्थानों पर चले जाते हैं। इससे उनके पेट में कीड़े विकसित हो जाते हैं। इसलिए एल्बेन्डाजॉल खाने से यह कीड़े पेट से बाहर हो जाते हैं। अगर यह कीड़े पेट में मौजूद हैं तो बच्चे के आहार का पूरा पोषण कृमि हजम कर जाते हैं। इससे बच्चा शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने लगता है। बच्चा धीरे-धीरे खून की कमी (एनीमिया) समेत अनेक बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। कृमि से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए यह दवा एक बेहतर उपाय है। जिन बच्चों के पेट में पहले से कृमि होते हैं उन्हें कई बार कुछ हल्के प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। जैसे हल्का चक्कर, थोड़ी घबराहट, सिर दर्द, दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, मितली, उल्टी या भूख लगना। इससे घबराना नहीं है। दो से चार घंटे में स्वतः ही समाप्त हो जाती है। आवश्यकता पड़ने पर आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि कृमि मुक्ति दवा बच्चे को कुपोषण, खून की कमी समेत कई प्रकार की दिक्कतों से बचाती है।

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