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टेट परीक्षा की तैयारी में जुटे शिक्षक फॉर्म आने का बेसब्री से कर रहे इंतजार, गहरी नींद में सोए हुए हैं जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को टेट पास होना अनिवार्य है। अब शिक्षक परेशान हैं क्योंकि 2011 के पहले नियुक्त हुए शिक्षक नौकरी कर रहे हैं लेकिन टेट नहीं किया है ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय टेट चलता ही नहीं था

Story Highlights
  • 8वीं तक शिक्षक बनने के लिए टेट अनिवार्य लेकिन यूपी में तीन साल से परीक्षा ही नहीं हुई
  • शिक्षा सेवा चयन आयोग को करवानी है परीक्षा

लखनऊ/कानपुर देहात। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को टेट पास होना अनिवार्य है। अब शिक्षक परेशान हैं क्योंकि 2011 के पहले नियुक्त हुए शिक्षक नौकरी कर रहे हैं लेकिन टेट नहीं किया है ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय टेट चलता ही नहीं था। अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि दो साल के अंदर उनको टेट करना जरूरी है। प्रदेश का हाल ये है कि यहां पर तीन साल से टेट की परीक्षा ही नहीं हुई फिलहाल जल्दी परीक्षा होने की कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है। लाखों शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सता रहा है।

ऐसे अनिवार्य हुआ टेट-
कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने के लिए हर शिक्षक को बीएड/बीटीसी के साथ ही टेट करना अनिवार्य है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत टेट को अनिवार्य किया गया था यह अधिनियम 2011 में लागू किया गया था। उससे पहले जो शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उनके लिए उस समय टेट अनिवार्य नहीं था। उनमें से कुछ का प्रमोशन भी हो गया और वे जूनियर हाईस्कूलों में कक्षा छह से आठ तक के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। प्रमोशन के लिए भी जूनियर टेट पास करना जरूरी है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुसार सभी शिक्षकों को टेट करना जरूरी है। इस मामले को लेकर शिक्षक कोर्ट गए। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शिक्षकों का तर्क था कि जब उनकी नौकरी लगी थी, उस समय टेट की अनिवार्यता नहीं थी। उसे बाद में उन पर कैसे थोपा जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को आदेश दिया कि एनसीटीई की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। सभी को टेट करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसमें से सिर्फ उन शिक्षकों को छूट दी है जिनका रिटायर होने में पांच साल से कम वक्त बचा है। वाकी सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर टेट करना जरूरी होगा।

आदेश ही अव्यावहारिक-
शिक्षकों का कहना है कि पहली बात तो टेट का आदेश ही अव्यावहारिक है। दूसरी बात यह कि जो शिक्षक या शिक्षक बनने के इच्छुक अन्य बेरोजगार युवा टेट करना चाहते हैं तो उसके लिए तो सरकार को व्यवस्था करनी होगी। सरकार को टेट परीक्षा करवाकर उन्हें मौका देना चाहिए। नियमानुसार साल में दो बार टेट परीक्षा होनी चाहिए।

प्रदेश का हाल ये है कि यहां आखिरी बार 2021 में टेट के लिए आवेदन मांगे गए थे। उसमें भी पेपर लीक हो गया था। वह परीक्षा आखिरी बार 2022 में हुई थी। तब से अब तक टेट नहीं हुई। ऐसे में टीचरों की उम्मीद टेट पर टिकी है।

आयोग नहीं करवा सका परीक्षा-
पहले टेट करवाने का जिम्मा परीक्षा नियामक प्राधिकारी का होता था। अब सरकार ने शिक्षा सेवा चयन आयोग गठित कर दिया है। अब इस आयोग को ही परीक्षा करवानी है। यह आयोग 2023 में गठित भी हो गया लेकिन तब से अभी तक एक भी परीक्षा नहीं कर पाया है। प्रोफेसर कीर्ति पांडेय एक सितंबर 2024 को आयोग की अध्यक्ष बनाई गई थी। वह भी 26 सितंबर को हट गई। अब आयोग कार्यवाहक अध्यक्ष के सहारे चल रहा है और अभी तक कोई परीक्षा नहीं करा सका है।

कैसे आया नौकरी पर संकट –
बेसिक शिक्षा परिषद में ही ऐसे करीब डेढ़ लाख शिक्षक है, जिन्होंने अभी तक टेट नहीं किया है। वे ज्यादातर 2011 के पहली के भर्ती है। कई तो ऐसे है जब शैक्षिक अर्हता इंटर और बीटीसी होती थी। वे टेट कैसे करें? वही कई मृतक आश्रित हैं जो सिर्फ इंटरमीडिएट ही पास हैं या स्नातक भी हैं लेकिन उनके पास बीएड बीटीसी नहीं है जिन्होंने टेट नहीं किया है। अब जो करना भी चाहते हैं, वे कहां से टेट करें? तीन साल से यूपी में कोई टेट परीक्षा नहीं हुई। जल्दी परीक्षा नहीं करवाई जाती तो उनके हाथ से मौके निकलते जाएंगे और नौकरी संकट में आ जाएगी। बेसिक शिक्षा परिषद के अलावा अन्य एडेड और प्राइवेट स्कूलों में भी इन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए टेट अनिवार्य है। वे भी इंतजार कर रहे हैं। लाखों की संख्या में युवा टेट के इंतजार में है। बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग एक स्वायत्त संस्था है। उसको ही परीक्षा करवानी है। फिर भी हम बात करेंगे कि जल्द से जल्द टेट का आयोजन किया जाए ताकि युवाओं को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें।

anas quraishi
Author: anas quraishi

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