परिवार के साथ अभिनय को धार दे रहे लखनऊ के ये कलाकार, तीन पीढ़ियों से कर रहे रामलीला
कहते हैं अभिनय मानव जीवन में समाहित रहता है। बचपन से ही उस अभनय की अनुभूति अपनों को होने लगती है। अभिनय को तराशने वाले सशक्त कलाकार की श्रेणी में आ जाते हैं और इसे जीवन में आत्मसात करके आगे बढ़ जाते हैं। रामलीला मंचन को आगे बढ़ाने में परिवार की भूमिका भी सशक्त होती है।

भाई-बहन और पिता निभाते हैं किरदारः कल्याणपुर में होने वाली रामलीला का भी अपना अलग स्थान है। बच्चे और बड़े मिलकर रामलीला का मंचन करते हैं। शिक्षा विभाग में नौकरी करने वाले हिमाशु जहां सुमंत का किरदार निभा रहे हैं तो बेटा हिमांशु-श्रीराम और बेटी भावना-लक्ष्मण का किरदार निभाएंगी। कांवेंट स्कूल में नवीं कक्षा में पढऩे वाली भावना इस बार राम बने अपने सगे भाई हाईस्कूल में पढऩे वाले हिमांशु के साथ लक्ष्मण के किरदार की रिहर्सल पूरी कर चुकी हैं। मंगलवार से मंचन के लिए तैयार हैं।
पिता मंथरा तो बेटा बनता है हनुमानः एलपीएस में अंग्रेजी माध्यम से कक्षा चार में पढऩे वाला देव कोहनी पिता के साथ मंच पर आने लगा है। पिता अश्वनी कुमार कोहली रेलवे में नौकरी करते हैं और मंथरा का किरदार निभाते हैं। नौकरी के दौरान रिहर्सल करने और फिर किरदार के साथ पदाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी की चुनौती उनके सामने होती है। रामलीला लगातार चलती रहे इसके लिए अपने बेटे को भी मंच पर उतारने का फैसला किया है। शिक्षा के साथ ही संस्कृति और संस्कार की शिक्षा देने की जिम्मेदारी परिवार की होती है। इस जिम्मेदारी को वह बखूबी निभा रहे हैं।
बेटे के सेवक बन गए हनुमान बने पिताः महानगर की बाल रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने वाले महेंद्र चंद्र पंत अपने बेटे श्रीराम बने प्रखर के सेवक के रूप में मंच पर नजर आते हैं। महेंद्र पंत का कहना है कि हम सब मिलकर जब तक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए आगे नहीं आएंगे तब तक संस्कृति को आगे बढ़ाया नहीं जा सकेगा। इसी मंशा के अनुरूप दो साल तक प्रखर ने श्रीराम का किरदार किया। बाल रामलीला में बड़े होने पर श्रीराम का किरदार नहीं दिया जाता। बड़ा होगा तो हनुमान का किरदार निभाएंगे। कुर्मांचलनगर में सीता-गौरी का किरदार दो सगी बहने और दशरथ-जनक का किरदार पिता पुत्र निभाते हैं।



