अक्षय नवमी को बेमौसम बरसात भी नहीं रोक पाई आस्था,भीगते हुए आंवले का किया पूजन
भारत की सनातन परम्परा में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि अक्षय नवमी के रूप में बड़ी तैयारियों के साथ मनाई जाती है जिसमें अमृत फल के रूप में चर्चित आंवला वृक्ष जिसके विषय में कहा जाता है

सुशील त्रिवेदी अमन यात्रा ब्यूरो। भारत की सनातन परम्परा में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि अक्षय नवमी के रूप में बड़ी तैयारियों के साथ मनाई जाती है जिसमें अमृत फल के रूप में चर्चित आंवला वृक्ष जिसके विषय में कहा जाता है कि यह ब्रम्हा जी के नेत्रों से निकला है इतना ही नहीं इसे धरती पर कल्पवृक्ष भी कहा गया है, का आज आस्था और विश्वास के साथ पूजन किया गया हालांकि सुबह से हो रही बेमौसम बारिश ने पूजन करने में व्यवधान उत्पन्न तो किया किन्तु विशेषकर महिलाओं के लिए बने इस पर्व पर उनकी आस्था को रोक नहीं पाई।अकबरपुर नगर पंचायत स्थित अकबरपुर इंटर कॉलेज परिसर में लगे आंवला वृक्ष पूजन के लिए गांधी नगर की महिलाओं ने एकत्रीकरण किया उनके साथ बच्चे भी पहुंचे और पूजन के बाद हाल में सामुहिक भोजन किया तथा प्रियजनों की सुख शांति और समृद्धि की कामना की। इस सम्बन्ध में आचार्य पंडित प्रशांत तिवारी ने बताया कि अक्षय नवमी 30 अक्तूबर को 10 बजे के बाद पूजन करने का विधान है जिसे पूर्व की ओर मुख करके Ghee का दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए जो विशेष फलदायी होता है।



