गीत
बहुत याद आए, अब साजन तुम्हारी l
बहुत याद आए, अब साजन तुम्हारी, कई रातें तुम्हारे बिना, हमने गुजारी I

बहुत याद आए, अब साजन तुम्हारी l
कई रातें तुम्हारे बिना, हमने गुजारी I
तुम गए हो कहां,
ये हम नहीं जानते हैं l
पर आंसू ये रुकना,
अब नहीं मानते हैं
दिल में बसी साजन, वो सूरत तुम्हारी ll
कई रातें तुम्हारे बिना, हमने पुजारी II1Il
व्याकुल है मन ये,
अब मिलने को तुमसे I
हो गई है खाता क्या,
आके बताना ये हमसे I
भूले नहीं है हम, उल्फत तुम्हारी l I
कई रातें तुम्हारे बिना, हमने पुजारी I I 2Il
कब होगा न जाने, चमन ये सुहाना l
तुम्हारे बिना जो, अब हुआ है वीराना I
पतझड़ ने मेरी, है ये बगिया उजारी I I
कई रातें तुम्हारे बिना, हमने पुजारी II3l I
मौलिक एवं स्वरचितरामसेवक वर्माविवेकानंद नगर पुखरायां कानपुर देहात उत्तर प्रदेश
