यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन: अब स्कूलों में नहीं चलेगी मनमानी केवल अधिकृत किताबों से ही होगी पढ़ाई
सत्र 2026-27 के लिए सख्त गाइडलाइन जारी अनधिकृत प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचने पर नपेंगे स्कूल संचालक

लखनऊ और प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों को एक कड़ा निर्देश जारी किया है। शैक्षिक सत्र 2026-27 में अब बोर्ड द्वारा अधिकृत पाठ्यपुस्तकों के अलावा किसी भी अन्य निजी प्रकाशक की महंगी किताबों से पढ़ाई कराना गैर-कानूनी माना जाएगा।
परिषद ने कक्षा 9 से 12 तक के कुल 36 विषयों के लिए एनसीईआरटी की 70 अधिकृत पाठ्यपुस्तकों को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा हिन्दी, संस्कृत और उर्दू जैसे विषयों की 12 चयनित पुस्तकें भी परिषद द्वारा निर्धारित की गई हैं। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली किताबें अत्यंत सस्ते दामों पर उपलब्ध कराना है क्योंकि निजी प्रकाशकों की किताबें परिषद की तुलना में 149% से 361% तक महंगी पाई गई हैं जिन पर अब पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा।
असली किताबों की पहचान के लिए उनके कवर पेज पर 7 अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग में सीरियल नंबर अंकित किया गया है और बिना इस नंबर वाली पुस्तकें अनधिकृत मानी जाएंगी। समस्त जनपदों में 15 अप्रैल तक सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा और नियम तोड़ने वाले प्रधानाचार्य, प्रबंधक या शिक्षकों के विरुद्ध इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों को जागरूक करने के लिए 15 अप्रैल 2026 तक सभी राजकीय एवं सहायता प्राप्त कॉलेजों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसमें अधिकृत मुद्रकों जैसे मे० पायनियर प्रिन्टर्स आगरा, मे० सिंघल एजेन्सीज लखनऊ और मे० पीताम्बरा बुक्स झांसी की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी ताकि छात्रों को सीधे सही दाम पर किताबें मिल सकें।
अभिभावक ध्यान दें कि स्कूल आपको किसी विशेष दुकान या निजी प्रकाशक की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। यदि ऐसा होता है तो तुरंत अपने जिले के डीआईओएस कार्यालय या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज करें।



