विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सीएसजेएमयू में “मेंटल हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम” सम्पन्न
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग द्वारा “मेंटल हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम” का दो दिवसीय आयोजन किया गया

- दो दिवसीय आयोजन में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, आत्म-अभिव्यक्ति और मानसिक सशक्तिकरण पर केंद्रित रही गतिविधियाँ
कानपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग द्वारा “मेंटल हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम” का दो दिवसीय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़ के अंतर्गत और कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक जागरूकता और आत्म-अभिव्यक्ति के महत्व को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के पहले दिन “एक्सप्रेशंस ऑफ अवेयरनेस एंड इमोशन” थीम के अंतर्गत “केनवास ऑफ केयर”, “द एक्सप्रेसिव लेंस” और “लेट इट आउट” जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इन गतिविधियों में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और रंगों, शब्दों तथा संवाद के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
“लेट इट आउट” में छात्रों ने गुमनाम रूप से अपने विचार साझा किए, जिससे सामूहिक भावनात्मक अनुभव उभरकर सामने आया।
इस दौरान श्री विमलेश अवस्थी ने रेकी की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि यह ऊर्जा संतुलन और मानसिक शांति प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है।
पहले दिन का प्रमुख आकर्षण “एल्गोरिदम से परे: डिजिटल दुनिया में भावनात्मक बुद्धिमत्ता” विषय पर आयोजित सत्र रहा, जिसका संचालन क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक एवं सहायक प्रोफेसर श्री सृजन श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने कहा कि आज की एआई-संचालित दुनिया में जहाँ तकनीकी दक्षता आवश्यक है, वहीं भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और मानवीय जुड़ाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम में बी.एससी. क्लिनिकल साइकोलॉजी के छात्रों द्वारा एक नाट्य प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें ओब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर , सिज़ोफ्रेनिया और शराब की लत जैसी मानसिक समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। छात्रों ने यह संदेश दिया कि मानसिक विकारों को छिपाने के बजाय समझना और सहायता लेना ही सही दिशा है।
दूसरे दिन, “हिडन बैटल: अ प्ले टू रेज़ अवेयरनेस” नामक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक में कन्वर्ज़न डिसऑर्डर और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकारों से जूझते व्यक्तियों के आंतरिक संघर्षों को संवेदनशीलता से प्रदर्शित किया गया।
डॉ. गणेश शंकर द्वारा “मेंटल हेल्थ एंड इमोशनल रेज़िलियंस” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने तनाव प्रबंधन, आत्म-दया और मानसिक संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने छात्रों को “आई लाइक मायसेल्फ” मंत्र अपनाने और “इमोशनल करेंसी” यानी भावनात्मक मूल्य को पहचानने का संदेश दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. गणेश शंकर, रागिनी रस्तोगी तथा पारुल राजोरिया (चेयरपर्सन, मधु रागिनी वेलफेयर फाउंडेशन) उपस्थित रहीं।
राजोरिया ने “डिकोडिंग सक्सेस” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्म-करुणा और आत्म-स्वीकृति में निहित है।
रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा ने छात्रों के शैक्षणिक दबाव, गीता के सन्दर्भ और सामाजिक कलंक पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
डॉ. संदीप सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें अभिव्यक्त करना चाहिए, क्योंकि अभिव्यक्ति ही मानसिक संतुलन का आधार है।
कार्यक्रम में एम.ए. क्लिनिकल साइकोलॉजी के छात्रों ने एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार हुआ।
समापन अवसर पर पोस्टर मेकिंग और सेल्फ-एक्सप्रेशन प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता की थीम थी “एक्सेसिबल मेंटल हेल्थ सर्विसेज़ ड्यूरिंग कैटास्ट्रोफेस एंड इमरजेंसीज़”, जिसमें छात्रों ने आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. प्रियंका शुक्ला, डॉ. अनीता अवस्थी, डॉ. उर्वशी, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. सत्येंद्र, श्री राजकुमार (फाइन आर्ट्स विभाग), मिठाई लाल तथा डॉ. रश्मि गोरे (नोडल अधिकारी, मिशन शक्ति) सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अनमोल श्रीवास्तव, दुर्गा यादव, अहमद अब्दुल्ला, श्री सृजन श्रीवास्तव, अंशिका अवस्थी, फलक परवेज़ तथा छात्रों का सराहनीय योगदान रहा।
दो दिवसीय कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर में आत्म-चिंतन, संवाद और करुणा का वातावरण निर्मित किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश छात्रों के बीच साझा किया गया –
“अपने मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं की देखभाल करना कमजोरी नहीं, बल्कि असली ताकत है। सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्म-स्वीकृति, आत्म-करुणा और भावनात्मक बुद्धिमत्ता में निहित है।”



