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पुखरायां में भक्ति की रसधारा: कान्हा ने एक उंगली पर थामा गोवर्धन, इंद्र का दर्प हुआ चूर

पुखरायां के सुआ बाबा मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल छाया हुआ है, जहाँ श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। कथावाचक पंकज तिवारी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्री कृष्ण की मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया।

Story Highlights
  • सुआ बाबा मंदिर परिसर में भागवत कथा: भक्तों की रक्षा को प्रभु धरते हैं रूप अनेक

पुखरायां के सुआ बाबा मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल छाया हुआ है, जहाँ श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। कथावाचक पंकज तिवारी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्री कृष्ण की मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने उस अद्भुत क्षण का चित्रण किया, जब बाल गोपाल ने अपनी नन्ही उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुलवासियों को मूसलाधार बारिश से बचाया और देवराज इंद्र के घमंड को पल भर में मिट्टी में मिला दिया।

तिवारी जी ने कहा कि भक्तों पर जब भी संकट आता है, करुणामय भगवान किसी न किसी रूप में धरा पर उतरकर उनकी रक्षा करते हैं। उन्होंने इंद्र के अभिमान की कथा सुनाते हुए कहा कि जब गोकुलवासी गोवर्धन पर्वत की पूजा में लीन थे, तब इंद्र को अपने ऐश्वर्य का घमंड हो गया। उन्होंने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए प्रचंड वर्षा शुरू कर दी, जिससे गोकुल में त्राहि-त्राहि मच गई और हर ओर भय व्याप्त हो गया। इंद्र चाहते थे कि गोकुलवासी केवल उन्हीं की आराधना करें।

ऐसे कठिन समय में, गोकुलवासियों ने अपने प्यारे कन्हैया से गुहार लगाई। भक्तों की पीड़ा देखकर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी लीला दिखाई और सहज ही अपनी एक छोटी उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। उन्होंने सभी गोकुलवासियों को उस पर्वत के नीचे शरण लेने के लिए कहा, जहाँ वे सुरक्षित रहे और इंद्र की बारिश का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस अलौकिक दृश्य ने इंद्र के अहंकार को चकनाचूर कर दिया और उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ।

कथावाचक पंकज तिवारी ने इस प्रसंग के माध्यम से यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और ईश्वर बड़े से बड़े अभिमानी का दर्प भी क्षण भर में तोड़ सकते हैं। इस भक्तिमय अवसर पर उषा द्विवेदी, राजू तिवारी, रामपाल, चंद्रपाल, बालमुकुंद सोनी, नरेश सैनी, निर्भय यादव, विष्णु और अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

aman yatra
Author: aman yatra

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