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कानपुर देहात: रायरामापुर में भागवत कथा के पहले दिन प्रसंग सुन श्रोता हुए भावविभोर

कथावाचक ने बताई कथा की महिमा

पुखरायां। भोगनीपुर तहसील क्षेत्र के रायरामापुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस में शनिवार को कथावाचक ने श्रोताओं को धुंधकारी की कथा सुनाई।कथा का वर्णन करते हुए कथावाचक आचार्य पंडित श्यामनारायण तिवारी ने कहा कि आत्मदेव ब्राह्मण का बेटा धुंधकारी बहुत ही दुष्ट,शराबी और हिंसक था। जिसनें वेश्याओं के चक्कर में अपनी संपत्ति बर्बाद कर दी और माता पिता को प्रताड़ित किया।अपने कुकर्मों के कारण धुंधकारी ने आत्महत्या कर ली और उसके बाद एक पिशाच बन गया,जो भयंकर यातनाएं सहन कर रहा था।

धुंधकारी के भाई गोकर्ण जो एक ज्ञानी संत थे,उन्होंने अपने भाई की मुक्ति के लिए सात दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन किया।गोकर्ण जी की कथा के दौरान प्रेत बने धुंधकारी ने बांस की सात गांठों में बैठकर सात दिनों तक कथा का श्रवण किया।जैसे जैसे कथा आगे बढ़ी,बांस की एक एक गांठ फटती गई और सातवें दिन वह प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य रूप धारण कर गया।यह कथा सिखाती है कि चाहे व्यक्ति ने कितने भी घोर पाप किए हों,श्रीमद्भागवत का श्रवण व भक्ति उसे नरक से बचाकर मोक्ष प्रदान कर सकती है। भागवत कथा का महत्व बताते हुए कथावाचक ने कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मिट जाता है।

जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया।वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है।आचार्य पंडित श्यामनारायण तिवारी ने कहा कि कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है।यह परमहंसों की संहिता है।भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाती है।यह भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है।यह ग्रन्थ वेद,उपनिषद का सार रूपी फल है।यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है।कथा को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

आयोजक मंडल से सोनी तिवारी ने बताया कि कथा का समापन 9 अप्रैल को होगा तथा 10 अप्रैल को कथा के समापन के अवसर पर विशाल गयाभोज का आयोजन किया जाएगा।इस मौके पर परीक्षित के रूप में श्रीमती शोभा तिवारी,रघुवीर तिवारी,निधि तिवारी,आलोक तिवारी,मदन मिश्रा,प्रदीप मिश्रा,शशांक पांडेय,विनोद पांडेय,सौरभ पांडेय,शिवांशु पांडेय विशाल पांडेय,आशीष पांडेय,अरविंद पाल,रामनाथ पाल,सुरेश पाल,अवधेश पाल,वीरेंद्र पाल समेत बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।

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aman yatra
Author: aman yatra

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