बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बदली, जानें अब कैसे बनेगा सर्टिफिकेट, देरी पर लगाना होगा कोर्ट का चक्कर
संसद के मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 पास कराया गया है।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र दोनों ही लोगों के लिए काफी जरूरी होता है। बर्थ सर्टिफिकेट किसी भी बच्चे के लिए उसकी पहली आईडी होती है। जिससे स्कूल-कॉलेज और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। इसके साथ ही मृत्यु के बाद भी मृतक का सर्टिफिकेट बनाना जरूरी होता है क्योंकि यह एक कानूनी दस्तावेज होता है।
इसका इस्तेमाल उनसे जुड़े परिवार के लोग बैंक या मालिकाना हक के लिए इस्तेमाल में लाते हैं लेकिन अब जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन के नियम में बदलाव किया गया है। संसद के मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 पास कराया गया है।
पहले लोकसभा और बाद में राज्यसभा में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 को पास कर दिया गया है। इसके साथ ही अब बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन 1969 के मूल अधिनियम में बदलाव हो गए हैं यानी जन्म और मृत्यु दोनों सर्टिफिकेट को बनवाने के नियम में बदलाव हो गया है। बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव को लेकर सरकार का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य देर से होने वाले बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त बनाना और फर्जी आईडी बनने से रोकना है।
क्या हुए हैं बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन में बदलाव-
यह नियम मुख्यतः उन लोगों के लिए बदला गया है जो जन्म और मृत्यु के समय रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं। यानी देरी करने पर नियम में बदलाव किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से दो बदलाव किए गए हैं पहला बदलाव के मुताबिक अगर बर्थ और डेथ की जानकारी 1 साल के बाद और 2 साल के भीतर दी जाती है तो इसका रजिस्ट्रेशन केवल डीएम, एडीएम या उनकी ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश और जांच के बाद ही हो सकेगा।
वहीं दूसरे बदलाव के मुताबिक अगर बर्थ और डेथ की जानकारी 2 साल से ज्यादा समय हो जाने के बाद दी जाती है तो इसका रजिस्ट्रेशन केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा। यानी दो साल की देरी होने के बाद आपको कोर्ट से ही इसका वेरिफिकेशन करवाना होगा।



