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पुखरायां में गूंजा महाकुंभ का जयकारा, यात्रियों का भव्य स्वागत

प्रयागराज महाकुंभ मेले में संगम में पवित्र स्नान के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं के प्रथम जत्थे का पुखरायां नगर में भव्य स्वागत किया गया। नगर पालिका मोड़ पर पालिका अध्यक्ष पूनम दिवाकर के नेतृत्व में नगर पालिका परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने यात्रियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया।

Story Highlights
  • पूनम दिवाकर ने महाकुंभ यात्रियों को किया सम्मानित
  • करुणा शंकर दिवाकर ने महाकुंभ यात्रा को बताया सौभाग्य, संगम स्नान को बताया पवित्र

पुखरायां: प्रयागराज महाकुंभ मेले में संगम में पवित्र स्नान के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं के प्रथम जत्थे का पुखरायां नगर में भव्य स्वागत किया गया। नगर पालिका मोड़ पर पालिका अध्यक्ष पूनम दिवाकर के नेतृत्व में नगर पालिका परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने यात्रियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस दौरान पालिका के कर्मचारी आशीष सैनी, धर्मपाल सिंह, बबलू सिंह, महेश सैनी, सुनील पाल, सुमित सचान, प्रमोद गुप्ता, राम सिंह और धर्मेंद्र यादव ने श्रद्धालुओं को नाश्ता प्रदान कर उनकी सेवा की।

जत्थे के पुखरायां नगर के मुख्य मार्ग से गुजरने पर श्रद्धालुओं का स्वागत और भी भव्य तरीके से किया गया। पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि करुणा शंकर दिवाकर, युवा समाजसेवी आशीष गोयल, सभासद अंकित अग्निहोत्री, सभासद निर्भय यादव, दिनेश चंद्र अग्रवाल, और पूर्व सभासद धीरेंद्र गुप्ता उर्फ पिंकू ने यात्रियों का हार्दिक स्वागत किया। फूल-मालाओं और भक्ति संगीत के साथ यह आयोजन नगर में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था।

पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि करुणा शंकर दिवाकर ने इस अवसर पर कहा, “महाकुंभ यात्रा में शामिल होना बड़े सौभाग्य की बात है। श्रद्धालु इलाहाबाद के संगम जैसे पवित्र स्थल पर स्नान करके अपने जीवन को धन्य करेंगे। यह यात्रा सभी के लिए आत्मिक शांति और पुण्य का अवसर है।”

नगर में इस आयोजन को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा गया। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने श्रद्धालुओं के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया और यात्रा को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग किया। पुखरायां नगर में यह आयोजन धार्मिक एकता और सद्भाव का प्रतीक बना।

श्रद्धालुओं ने नगर पालिका और स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए स्वागत और सेवा के लिए आभार प्रकट किया। महाकुंभ यात्रा के इस पहले जत्थे ने नगर से विदा होकर संगम की ओर अपना मार्ग प्रशस्त किया।

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