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सरकारी आवास का झाँसा, अश्लील धमकी का डर: कानपुर देहात में 4 शातिर साइबर अपराधी गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला था जाल

कानपुर देहात पुलिस ने किया बड़े साइबर गैंग का खुलासा।

कानपुर देहात में साइबर अपराधों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत, एसओजी टीम, थाना साइबर क्राइम और थाना अकबरपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए चार शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह गैंग लोगों को सरकारी आवास विकास योजनाओं के नाम पर ठगता था और साथ ही अश्लील फिल्म देखने के नाम पर अपराध करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग से पैसे हड़पने का घिनौना काम करता था।

ब्लॉक हुए खाते ने खोली ठगी की पोल

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार यादव (निवासी अकबरपुर) ने पुलिस को लिखित शिकायत दी। जितेंद्र ने बताया कि 10 सितंबर 2025 को वीरेंद्र कुमार और उसके चार अन्य साथी अखिलेश सिंह, देवेंद्र प्रताप, अनुज सिंह व मदरेश सिंह ने विभिन्न लोगों से फ्रॉड किए हुए रुपयों को आवेदक के साइबर कैफे पर यूपीआई के माध्यम से डालकर नगद ले लिए। कुछ दिनों बाद जब जितेंद्र का खाता अचानक ब्लॉक (फ्रीज) हो गया, तब उन्हें पता चला कि उनके खाते में धोखधड़ी का पैसा आया था, जिसके कारण बैंक ने खाता बंद कर दिया। इस शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम पर धारा 318(4)/308(5)/351(2)(3) बीएनएस व 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।

4 अपराधी गिरफ्तार, 7 मोबाइल फोन बरामद

मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर दिनांक 29 नवंबर 2025 को एसओजी टीम, थाना साइबर क्राइम और थाना अकबरपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों में अखिलेश सिंह चौहान (उम्र 24 वर्ष, निवासी मंगौलपुर), अनुज सिंह (उम्र 21 वर्ष, निवासी शीतलपुर), देवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ गौरे (उम्र 35 वर्ष, निवासी मंगोलपुर) और मदरेश (उम्र 40 वर्ष, निवासी शीतलपुर, मूल निवासी प्रतापगढ़) शामिल हैं। अभियुक्तगण के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए सात मोबाइल फोन (स्मार्ट फोन व की-पैड) बरामद किए गए, जिनमें वीवो एक्स80, मोटोरोला एज 60 फ्यूजन, ओप्पो ए12 जैसे मॉडल शामिल हैं।

 सरकारी योजना और अश्लील धमकी से करते थे ब्लैकमेल

पूछताछ में अभियुक्तों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे अनजान नंबरों पर कॉल करके लोगों को सरकारी आवास योजना में मकान दिलाने का लालच देते थे। जो लोग पैसे नहीं देते थे, उन्हें अश्लील फिल्म देखने का अपराध करने की धमकी देकर पैसा वसूलते थे। इन पैसों को वे साइबर कैफे पर यूपीआई के माध्यम से भेजकर नगद ले लेते थे। इस गैंग का मुख्य सरगना वीरेंद्र कुमार अभी भी फरार है, जिसके विरुद्ध विधिक कार्यवाही जारी है। गिरफ्तारशुदा अभियुक्तगण के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही करते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

पुलिस ने जनता से अपील की है कि खाते से धोखाधड़ी से पैसा निकलने की दशा में तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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