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अस कहि चला विभीषण जबहीं आयूहीन भये सब तबहीं

जनपद कानपुर देहात मुख्यालय स्थित अकबरपुर में चल रही रामलीला में लंका के राजा रावण द्वारा किए गए अपमान से क्षुब्ध होकर भाई विभीषण ने भगवान राम की शरण में जाने की घोषणा कर दी जिसके साथ ही ल॔कावासियों पर आयुहीनता का प्रभाव देखने को मिला।

Story Highlights
  • विभीषण शरणागत,सेतुबंध स्थापना,अंगद पैज की लीला संपन्न

सुशील त्रिवेदी,  कानपुर देहात। जनपद कानपुर देहात मुख्यालय स्थित अकबरपुर में चल रही रामलीला में लंका के राजा रावण द्वारा किए गए अपमान से क्षुब्ध होकर भाई विभीषण ने भगवान राम की शरण में जाने की घोषणा कर दी जिसके साथ ही ल॔कावासियों पर आयुहीनता का प्रभाव देखने को मिला।

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उल्लेखनीय है कि लंकादहन के बाद रामादल की शक्ति का अनुमान लगाकर विभीषण ने रावण को समझाने का हर संभव प्रयास किया किन्तु सब व्यर्थ ही साबित होता है जब रावण ने विभीषण को अपमानित करते हुए कहा अरे दुष्ट तू खाता मेरा है और पक्ष दुश्मन का लेता है,इसलिए जा उसी को सुझाव दे।ज्ञातव्य है कि विभीषण शरणागत होते ही रामसेतु निर्माण की योजना तैयार कराते हैं जिसमें समुद्र के सुझाव पर नल और नील नामक योद्धाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसके कारण राम की सेना लंका के प्रवेश द्वार पर पहुंचने में सफल हो जाती है।हालांकि राम ने एक बार फिर युद्ध टालने की योजना तैयार करते हुए युवराज अंगद को दूत नियुक्त कर लंका भेजा लेकिन रावण पर जैसे मौत का पहरा सा छा गया था,और उसने शान्ति प्रस्ताव ठुकरा दिया।इधर अंगद और रावण के तर्कपूर्ण व चुटीले संवादों को दर्शकों ने आनन्दित होकर सुना ।

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इस अवसर पर श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष सूर्यकांत त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष अनूप कुमार त्रिपाठी गोरे,उपाध्यक्ष अभिषेक गुप्ता,जितेंद्र द्विवेदी बीटू,आय व्यय निरीक्षक जितेंद्र सिंह गुड्डन, मेला प्रभारी श्याम ओमर, मीडिया प्रभारी मनी गुप्ता आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे। पुलिस प्रशासन ने भी गस्त करके सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया एवं मेले में दुकान सजाए लोगों का पहचान पत्र एवं अनुमति पत्र जांचा।

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