उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति 2019: जालौन में हरी मटर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े प्रोत्साहन
उरई में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर जागरूकता कार्यक्रम
- उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए नीति 2019 में विभिन्न प्रोत्साहन दिए हैं।
- जालौन में डकोर और सीताराम ओवरसीज प्रोडूसर कंपनियों द्वारा हरी मटर के 3 क्लस्टर प्रस्ताव भेजे गए हैं।
- क्लस्टर विकास, नई प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और निर्यात परिवहन पर सब्सिडी उपलब्ध।
- बुन्देलखण्ड कठिया गेहूं को प्राप्त जी०आई० टैग के लाभों पर भी जानकारी दी गई।
- मंडी अधिनियम 2018 के तहत किसानों को उपज बिक्री के लिए वैकल्पिक स्थान की सुविधा।
उरई,जालौन। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति-2019 को अधिसूचित किया था। इस नीति की नोडल एजेन्सी कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय, उ०प्र० है। इसी उद्देश्य के तहत, जिला स्तर पर निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में “जिला स्तरीय क्लस्टर सुविधा इकाई” का भी गठन किया गया है।
19 अक्टूबर 2025 को, ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक धीरपाल सिंह ने जनपद के किसान उत्पादन संगठन, किसान उत्पादक कंपनी और प्रगतिशील किसानों के साथ एक बैठक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात प्रोत्साहन अनुदान, भौगोलिक उपदर्शन (जी०आई०), एगमार्क वर्गीकरण, और मंडी अधिनियम (संशोधन) 2018 के तहत दिए गए प्रावधानों और सुविधाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
धीरपाल सिंह ने बताया कि नीति 2019 में निर्यातकों और किसानों के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहन प्रावधानित किए गए हैं:
- क्लस्टर विकास प्रोत्साहन: कृषि निर्यात उन्मुख क्लस्टर के पंजीकरण और निर्यात दायित्व पूर्ण होने पर, 05 वर्षों में ₹10 लाख तक का प्रोत्साहन देय है (प्रथम 50 हे० से 100 हे० तक)। उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात होने की स्थिति में, प्रत्येक 50 हे० अतिरिक्त क्षेत्रफल बढ़ने पर ₹6 लाख अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह राशि एफ०पी०ओ०/ एफ०पी०सी०/ किसान समूह को ही अनुमन्य है।
- जालौन की स्थिति: जनपद में डकोर मटर प्रोडूसर कम्पनी लिमिटेड उरई और सीताराम ओवरसीज प्रोडूसर कम्पनी लिमिटेड उरई द्वारा हरी मटर के कुल 3 क्लस्टर गठन हेतु प्रस्ताव शासन को प्रेषित किए गए हैं।
- प्रसंस्करण इकाई प्रोत्साहन: क्लस्टर्स के निकट नई प्रसंस्करण इकाई, पैकहाउस, शीतगृह आदि स्थापित करने एवं निर्यात दायित्व पूर्ण होने पर, ₹25 लाख या टर्न ओवर का 10 प्रतिशत, जो भी कम हो, का प्रोत्साहन 05 वर्षों तक दिया जाएगा। यह सुविधा निर्यात प्रारंभ होने के एक वर्ष से न्यूनतम 40 प्रतिशत निर्यात करने पर मिलेगी।
बैठक में अन्य महत्वपूर्ण अनुदानों की जानकारी दी गई:
- परिवहन अनुदान: कृषि उत्पादों के निर्यात हेतु वास्तविक भुगतान किए गए भाड़े का 25 प्रतिशत (अधिकतम ₹20 लाख प्रति निर्यातक/फर्म प्रतिवर्ष) परिवहन अनुदान के रूप में दिया जाएगा। यह अनुदान मांस और चीनी के निर्यात पर देय नहीं होगा।
- प्रमाणीकरण हेतु अनुदान: Good Agricultural Practices (जी०ए०पी०) या जैविक/प्राकृतिक प्रमाणीकरण के लिए कुल व्यय का 50 प्रतिशत (क्रमशः अधिकतम ₹1.50 लाख और ₹1.00 लाख) एक वित्तीय वर्ष में प्रदान किया जाएगा।
- जी०आई० टैग का महत्व: जनपद के बुन्देलखण्ड कठिया गेहूं को जी०आई० टैग प्राप्त है। धीरपाल सिंह ने इसके लाभ बताते हुए कहा कि यह उत्पाद को कानूनी संरक्षण देता है, अनधिकृत प्रयोग पर अंकुश लगाता है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ट्रेडमार्क के रूप में पहचान बनाकर निर्यात और स्थानीय आमदनी को बढ़ाता है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने मंडी अधिनियम 2018 के प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत भाण्डागारों और शीतगृहों को मंडी उपस्थल घोषित करने और मंडी स्थलों से बाहर उत्पादक से सीधा थोक क्रय हेतु लाइसेंस प्रदान करने की सुविधा है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध होते हैं।



