कानपुर-मूसानगर CNG बसों का संचालन बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त
मनमाना किराया वसूल रहे ऑटो-ई रिक्शा संचालक; जिलाधिकारी से फिर उठाई गई बसों के पुनः संचालन की मांग

- कानपुर से गजनेर वाया मूसानगर मार्ग पर सीएनजी बसों का संचालन अचानक बंद।
- सरकारी/निजी कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों के सामने आवागमन का संकट।
- ऑटो व ई-रिक्शा संचालकों द्वारा किराया दो गुना कर मनमानी वसूली।
- गजनेर व्यापार मंडल अध्यक्ष नीरज गुप्ता, राघव शुक्ला सहित कई नेताओं ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की।
- बताया गया कि एक प्राइवेट कंपनी के साथ 15 वर्ष का अनुबंध समाप्त होने के कारण संचालन रोका गया है।
सरवनखेड़ा (कानपुर देहात): कानपुर से गजनेर होते हुए मूसानगर तक चलने वाली सीएनजी बसों का संचालन अचानक बंद हो जाने से इस मार्ग के निवासियों, व्यापारियों, सरकारी एवं निजी संस्थाओं के कर्मचारियों और छात्रों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। यह मार्ग गजनेर-कानपुर के लोगों के लिए बेहतरीन और हर घंटे उपलब्ध होने वाली बस सेवा का साधन था, जिसके बंद होने से क्षेत्र में विकराल संकट खड़ा हो गया है।
मनमानी किराए से यात्रियों को दोहरी मार
बसों के बंद होने का सीधा फायदा ऑटो और ई-रिक्शा संचालकों द्वारा उठाया जा रहा है। इन संचालकों ने गजनेर, मूसानगर और गजनेर-रायपुर मार्ग पर किराया दोगुना कर दिया है, जिससे यात्रियों की जेबों में सरेआम डाका डाला जा रहा है और लोगों को दोहरे संकट से गुजरना पड़ रहा है।
व्यापारी और नेता पहुंचे जिलाधिकारी के पास
इस विकराल समस्या को लेकर गजनेर व्यापार मंडल अध्यक्ष नीरज गुप्ता, युवा समाजसेवी और सराफा व्यवसायी रोहन बाजपेयी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राघव शुक्ला, सरवनखेड़ा व्यापार मंडल अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, समाजसेवी संजू बाजपेई, प्रमुख व्यवसायी प्रशांत सिंह भदौरिया और रोहित गुप्ता ने कानपुर देहात जिलाधिकारी से जनहित में बसों के पुनः संचालन की तत्काल मांग की है।
व्यापारी नेताओं एवं राजनीतिक दलों के नेताओं ने जिला प्रशासन से बसों के पुनः संचालन की मांग पहले भी उठाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
कंपनी का अनुबंध समाप्त होने का कारण
जानकार लोगों ने बताया कि कानपुर घंटाघर से मूसानगर के लिए करीब 7-8 सीएनजी बसों का संचालन होता था, जो एक प्राइवेट कंपनी के साथ सरकार के 15 वर्ष के अनुबंध की समाप्ति के कारण रोक दिया गया है। लोगों का प्रश्न है कि बसों का संचालन बंद करने से पहले सरकार को अनुबंध बढ़ाने या नई बसों को डलवाने की वैकल्पिक व्यवस्था कर लेनी चाहिए थी। शासन-प्रशासन द्वारा ऐसा न करना क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय माना जा रहा है।



