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कानपुर: खेत तालाब में अब चमकेगा मीठे पानी का मोती, योगी सरकार की इस योजना से किसानों की होगी मोटी कमाई

कानपुर में तय हुआ 15 तालाबों का लक्ष्य, सीप पालने से लेकर तालाब खुदाई तक पर मिलेगा भारी सरकारी अनुदान

कानपुर नगर: अगर आपके पास खेत में छोटा सा तालाब है या आप नया तालाब बनवाने की सोच रहे हैं, तो योगी सरकार आपके लिए बंपर कमाई का एक शानदार मौका लेकर आई है। सरकार की नई नीति के तहत अब कानपुर के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ मोतियों की कमर्शियल खेती यानी पर्ल फार्मिंग से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए कानपुर जिले में पहले चरण के लिए 15 खेत तालाबों का एक विशेष लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को सीप पालने के तकनीकी झंझटों से परेशान नहीं होना पड़ेगा। सीप कहाँ से आएंगे, उनकी सर्जरी कैसे होगी और न्यूक्लियस कैसे डाला जाएगा, यह सारा तकनीकी काम सरकारी एक्सपर्ट खुद अपनी देखरेख में कराएंगे।

लागत पर मिलेगी 40% की भारी छूट, एक फसल में होगा 90 हजार का शुद्ध मुनाफा

सरकार ने इस योजना के खर्च और मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब भी साफ कर दिया है। अगर आपके पास 440 वर्ग मीटर का एक छोटा खेत तालाब है, जिसमें साल भर कम से कम डेढ़ मीटर पानी रुकता हो, तो उसमें कुल 2,000 सीप डाले जाएंगे। सीप खरीदने, सर्जरी और ऑक्सीजन सेट आदि को मिलाकर कुल डेढ़ लाख रुपये का खर्च आएगा, जिस पर सरकार 40 प्रतिशत का सीधा अनुदान (सब्सिडी) देगी। प्राथमिकता वाले विशेष लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक की छूट भी मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 60 प्रतिशत सीप भी जीवित बच जाते हैं, तो आराम से 2,400 मोती तैयार हो जाएंगे। बाजार में एक मोती कम से कम 100 रुपये का बिकता है, जिससे करीब नब्बे हजार रुपये का सीधा शुद्ध मुनाफा होगा।

नया तालाब और पंपिंगसेट खरीदने पर भी सब्सिडी, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

सरकार केवल मोती पालन पर ही नहीं, बल्कि तालाब तैयार करने और सिंचाई की मशीनरी पर भी दिल खोलकर मदद दे रही है। नया तालाब खुदवाने पर लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम 52,500 रुपये) और पंपिंगसेट खरीदने पर भी 50 प्रतिशत की छूट (अधिकतम 15,000 रुपये) का अनुदान दिया जाएगा। इस शुद्ध पानी में किसान मोती के साथ-साथ बिना किसी केमिकल के मछली पालन भी कर सकेंगे। योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसानों को आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल agriculture.up.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। लक्ष्य से ज़्यादा आवेदन आने पर कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन ई-लॉटरी सिस्टम से पारदर्शी चयन किया जाएगा। वेरिफिकेशन के बाद सब्सिडी का पूरा पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा।


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