कानपुर देहात: पात्रता के बाद भी नहीं मिला पक्का मकान, तीन बच्चों के साथ खुली छत के नीचे रहने को मजबूर बेबस मां
ग्रामीणों ने भी की निष्पक्ष जांच कर जल्द पक्का मकान दिलाने की मांग।

कानपुर देहात के डेरापुर विकास खंड अंतर्गत ग्राम रतनियापुर से सरकारी दावों की पोल खोलने वाला एक मामला सामने आया है। गांव की निवासी ममता कुशवाहा पत्नी अजय कुशवाहा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ न मिलने पर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का कहना है कि वह योजना की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं, इसके बावजूद प्रशासनिक अनदेखी के कारण अब तक उनका नाम लाभार्थी सूची में शामिल नहीं किया गया है।
आर्थिक रूप से बेहद कमजोर इस परिवार की स्थिति इतनी दयनीय है कि ममता कुशवाहा अपने तीन मासूम बच्चों के साथ खुली छत के नीचे रहने को मजबूर हैं। मौसम की हर मार को झेलते हुए वह किसी तरह दिन काट रही हैं। पीड़िता का आरोप है कि गांव के अन्य पात्र लोगों को आवास स्वीकृत हो चुके हैं और उनके मकान भी बन रहे हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर इस लाभ से वंचित रखा गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना के आंकड़ों, ग्राम सभा के सत्यापन और निर्धारित पात्रता मानकों के आधार पर किया जाता है। अक्सर देखा जाता है कि तकनीकी खामियों, दस्तावेजों में त्रुटि, सत्यापन लंबित रहने या फिर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही के चलते वास्तविक पात्र लोग योजना की मुख्यधारा से छूट जाते हैं।
ममता कुशवाहा ने उच्चाधिकारियों और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से मांग की है कि उनकी पात्रता की जमीनी स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें जल्द से जल्द योजना का लाभ दिलाया जाए। इस मामले में गांव के अन्य लोगों ने भी पीड़िता का समर्थन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई गरीब और वास्तविक पात्र व्यक्ति इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित है, तो यह गंभीर विषय है। प्रशासन को तुरंत जांच कर परिवार को पक्का आवास मुहैया कराना चाहिए। अब देखना यह होगा कि खंड विकास अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर कब तक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाते हैं।
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