कानपुर: स्वास्थ्य केंद्र में डीएम की रेड: फार्मासिस्ट को बिना बताए गायब रहना पड़ा भारी, एक झटके में रुकी सैलरी, मच हड़कंप
फील्ड में गईं एएनएम को फोन लगाकर जिलाधिकारी ने खुद जांची लोकेशन।

कानपुर नगर में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह अचानक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अहिरवां जा पहुंचे। शनिवार को हुए इस औचक निरीक्षण से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर एक-एक व्यवस्था को बारीकी से परखा और लापरवाही मिलने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई भी की।
निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारी डॉ. बृजभान सिंह यादव मौके पर मौजूद मिले। उन्होंने जिलाधिकारी को अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों, दवाओं की स्थिति और पैथोलॉजी सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चिकित्सा अधिकारी ने दावा किया कि केंद्र पर मरीजों के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं और जांच का काम भी ठीक से चल रहा है।
इस दौरान जब जिलाधिकारी ने स्टाफ की मौजूदगी जांची, तो फार्मासिस्ट योगेश सिंह ड्यूटी से गायब मिले। उनकी इस लापरवाही पर जिलाधिकारी ने सख्त नाराजगी जताई और तत्काल उनका एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए, साथ ही उनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा।
निरीक्षण में तीन एएनएम भी अपनी सीट पर नहीं थीं। जब उनके बारे में पूछताछ की गई तो पता चला कि वे क्षेत्र में टीकाकरण करने गई हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कोई ढिलाई न बरतते हुए तुरंत मोबाइल फोन से उनसे बात की और उनकी लाइव लोकेशन व फील्ड में चल रहे काम का सत्यापन किया।
इसके बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया। उन्होंने पूछा कि दवाएं बाहर से तो नहीं लिखनी पड़ रहीं और डॉक्टर ठीक से देख रहे हैं या नहीं। मरीजों ने अस्पताल की सेवाओं को लेकर संतोष जताया।
जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि अस्पताल में दवाओं का स्टॉक हमेशा पूरा रहना चाहिए। किसी भी मरीज को इलाज या पैथोलॉजी जांच के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने मातृ-शिशु स्वास्थ्य और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों को पूरी गंभीरता से चलाने और जनता को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज देने की बात कही।
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