SC/ST एक्ट का दुरुपयोग महंगा पड़ा: झूठी FIR पर महिला को 3 साल 6 महीने की जेल
लखनऊ कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जज बोले: अब सिर्फ FIR से नहीं मिलेगा मुआवजा, चार्जशीट जरूरी

लखनऊ: SC/ST एक्ट के तहत झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के लिए लखनऊ कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। एक महत्वपूर्ण फैसले में, कोर्ट ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाली एक महिला को तीन साल और छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई है।
जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इस दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, “सरकार का पैसा ईमानदार टैक्सपेयर्स की कमाई है, इसे ऐसे लोगों को नहीं दिया जा सकता जो कानून का दुरुपयोग करते हैं।”
अब मुआवजे के लिए चार्जशीट ज़रूरी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब केवल एफआईआर दर्ज होने से मुआवजा नहीं मिलेगा, बल्कि मुआवजे के लिए चार्जशीट दाखिल होना और सबूत होना जरूरी है। जज ने कहा कि आपराधिक मामला तभी “रूप लेता है” जब जांच के बाद चार्जशीट दाखिल होती है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 3 अगस्त 2019 का है। महिला ने माल थाना क्षेत्र में तीन लोगों पर छेड़छाड़ और चेन स्नैचिंग का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि वह अपने मामा के घर से लौट रही थी, जब तीन लोगों ने उस पर हमला किया।
हालांकि, मालियाबाद के सर्कल ऑफिसर ने जब मामले की तहकीकात की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। जांच में पता चला कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। सामने आया कि एफआईआर निजी दुश्मनी और राजनीतिक रंजिश के कारण दर्ज कराई गई थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिला ने कोर्ट में खुद कबूल किया कि उसने यह केस “बदले की भावना” से दर्ज कराया था। कोर्ट के इस फैसले को SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



