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जनगणना के चलते यूपी में शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक, केवल विशेष परिस्थितियों में मिलेगा स्थानांतरण

डिजिटल क्रांति, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और जनकल्याणकारी योजनाओं से देश के बुनियादी ढांचे में आया अभूतपूर्व बदलाव।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत लाखों शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। यूपी शासन ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए सामान्य अंतर्जनपदीय तबादलों पर रोक लगा दी है। अब केवल विशेष, मानवीय और चिकित्सीय परिस्थितियों में ही शिक्षकों के स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2026-27 की जनगणना में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों का 31 मार्च 2027 तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के सामान्य अंतर्जनपदीय तबादले भी नहीं होंगे।

शासन ने कुछ विशेष हालातों में शिक्षकों को राहत दी है। आदेश के मुताबिक अगर शिक्षक, शिक्षिका, उनके पति-पत्नी या अविवाहित पुत्र अथवा पुत्री दिव्यांग हैं तो ऐसे मामलों में अंतर्जनपदीय स्थानांतरण किया जा सकेगा। इसी तरह शिक्षक या उनके अविवाहित पुत्र-पुत्री कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं तो भी तबादले की अनुमति मिल सकती है। डायलिसिस पर निर्भर मरीजों के मामलों को भी विशेष श्रेणी में रखा गया है।

पति-पत्नी दोनों शिक्षक हैं तो मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने उन दंपतियों को भी राहत देने का प्रावधान किया है जो दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे मामलों में शिक्षक-छात्र अनुपात (पीटीआर) को ध्यान में रखते हुए पति या पत्नी में से किसी एक का ट्रांसफर किया जा सकेगा ताकि परिवार को एक स्थान पर रहने में सुविधा मिल सके। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई अन्य विशेष या कठिन परिस्थिति सामने आती है तो मुख्यमंत्री की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद स्थानांतरण पर विचार किया जा सकेगा यानी सामान्य नियमों से बाहर के मामलों में आखिरी फैसला सरकार स्तर पर लिया जाएगा।

दरअसल यूपी शासन का मानना है कि शैक्षिक सत्र के दौरान बड़े पैमाने पर तबादलों से विद्यालयों में टीचिंग का काम प्रभावित हो सकता है। साथ ही आने वाले जनगणना कार्य को देखते हुए भी कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करना जरूरी है इसी वजह से सामान्य तबादलों पर रोक लगाते हुए केवल मानवीय और चिकित्सीय मामलों को प्राथमिकता दी गई है। इस फैसले से हजारों शिक्षकों की सामान्य तबादले की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है लेकिन गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों को ही राहत मिल सकती है।

 


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