गरीबी में पला ‘माइकल’ बना हिम्मत की मिसाल — डांस कोरियोग्राफर देव राजपूत ने संभाली ज़िंदगी की डोर
अलीगढ़ के एक छोटे से गाँव सोफा कहर की तंग गलियों में मिट्टी की दीवारों और टूटी चारपाई के बीच एक कहानी जन्म ले रही है — उम्मीद की कहानी, हिम्मत की कहानी, एक ऐसे बच्चे की कहानी जिसका नाम है मायकल।मायकल के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। सुबह से शाम तक पसीना बहाकर जो कमाई होती है, वही घर की रोटी बनती है

- "आर्थिक तंगी से जूझता हुआ बच्चा बना सबका चहेता, डांस से जीता सोशल मीडिया पर दर्शकों का दिल - डांस कोरियोग्राफर देव राजपूत ने किया सम्मान, सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल।"
अमन यात्रा ब्यूरो। अलीगढ़ के एक छोटे से गाँव सोफा कहर की तंग गलियों में मिट्टी की दीवारों और टूटी चारपाई के बीच एक कहानी जन्म ले रही है — उम्मीद की कहानी, हिम्मत की कहानी, एक ऐसे बच्चे की कहानी जिसका नाम है माइकल। माइकल के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। सुबह से शाम तक पसीना बहाकर जो कमाई होती है, वही घर की रोटी बनती है। कई बार उस दिन भी चूल्हा ठंडा रह जाता है। माँ कहती हैं –
“हमारा बेटा नाचना जान गया है, पर पेट खाली ही रहता है… सरकार वाले आते हैं, फोटो खींचकर चले जाते हैं, पर मदद कोई नहीं करता।”
यह वही सच्चाई है जो आज भी हजारों गरीब घरों के भीतर छिपी है — जहाँ टैलेंट तो है, पर मौके नहीं।
इसी दौरान गाँव में पहुँचे स्लम स्टार वेलफेयर सोसाइटी और रैपर डांस एकेडमी के संस्थापक डांस कोरियोग्राफर देव राजपूत। उन्होंने जब माइकल को ज़मीन की धूल पर अपनी ताल बनाते देखा, लगा जैसे मिट्टी भी उसकी लय में मुस्कुरा रही हो।, तो भावुक हो उठे। उन्होंने तुरंत घोषणा की
“जब तक मैं ज़िंदा हूँ, यह बच्चा बिना पैसे के डांस, सीखेगा और मंच पाएगा।”
डांस कोरियोग्राफर देव राजपूत ने न सिर्फ माइकल को फ्री डांस ट्रेनिंग देने का वादा किया, बल्कि उसे मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया। तालियों की गूंज के बीच देव राजपूत बोले —
“जिसे सिस्टम ने ठुकराया, उसे मैं अपनाऊंगा। जब तक एक भी इस देश में है, मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा।”
उस दिन मंच पर जब माइकल नंगे पैरों से नाच रहा था, तो दर्शकों की आँखें नम थीं।
लोग सिर्फ एक बच्चा नहीं देख रहे थे — वे उस दर्द को देख रहे थे जो हजारों गरीब बच्चों के भीतर दबा है, जो हुनरमंद हैं पर हालातों से जकड़े हुए हैं।
आज तक किसी सरकारी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने माइकल की सुध नहीं ली। लेकिन एक समाजसेवी ने जो किया, वही सच्ची इंसानियत है।
डांस कोरियोग्राफर देव राजपूत आज भी कहते हैं —
मेरे पास धन नहीं, पर दिल है। जब तक मैं हूँ, कोई गरीब बच्चा मंच से दूर नहीं रहेगा।”
मायकल की यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं है, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो गरीब बच्चों के सपनों को आँकड़ों में गुम कर देता है।
अगर कभी किसी सरकारी फाइल में इंसानियत का कोई कॉलम बने,
तो उसमें इस बच्चे की तस्वीर होनी चाहिए क्योंकि मायकल की मुस्कान भूख के बीच भी हिम्मत का नाच है।



