दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नोडल शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
स्थानीय बीआरसी धाता में द्वितीय चरण के नोडल शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की पहचान करने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाना था।

विवेक सिंह, धाता/फतेहपुर। स्थानीय बीआरसी धाता में द्वितीय चरण के नोडल शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की पहचान करने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाना था।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण का शुभारंभ स्पेशल एजुकेटर्स द्वारा किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना और उनकी अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाना था।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिनमें शामिल थे:
- दिव्यांगजनों की शिक्षा में सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी का उपयोग
- प्रबंध पाठ सहगामी क्रियाओं का महत्व
- अधिगम के लिए सार्वभौमिक क्रियाओं का अनुप्रयोग
- निदानात्मक शिक्षण और उसके क्रियान्वयन के चरण
- बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में शिक्षण रणनीतियाँ
- होम बेस्ड एजुकेशन की उपयोगिता
- विद्यालय सुगम्यता सर्वेक्षण
- समर्थ मोबाइल एप/पोर्टल पर बच्चों की उपस्थिति और एलईपी की जानकारी
संदर्भ दाता पंकज कुमार, राजाराम, मंजीत कुमार और अमन मिश्रा ने अपने-अपने विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्पेशल एजुकेटर्स ने दिव्यांग बच्चों की उपस्थिति और असेसमेंट एक्टिविटी पर विशेष जोर दिया।
प्रशिक्षण में 50 से अधिक नोडल शिक्षकों ने भाग लिया। समापन समारोह में खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार सिंह ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को अपने विद्यालयों में अवश्य लागू करें, ताकि इसका लाभ समाज तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना है, और शिक्षकों को इस दिशा में पूरी मेहनत करनी चाहिए।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में प्रमोद कुमार पांडे, सतीश पांडे, अजय भारती, धीरेंद्र सिंह, रसूलपुरी, कल्याण सिंह, नितिन सिंह और शाहिद बीआरसी के कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ, और उन्हें दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की।



