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दोस्ती की अटूट मिसाल: मित्र के बेटों के सिर पर रखा हाथ, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने पुखरायां में साझा किया परिवार का दर्द

राजनीति के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इंसान अपनी जड़ों और रिश्तों को कैसे ज़िंदा रखता है, इसकी एक भावुक झलक रविवार को पुखरायां में देखने को मिली।

सुनीत श्रीवास्तव, पुखरायां, कानपुर देहात। राजनीति के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इंसान अपनी जड़ों और रिश्तों को कैसे ज़िंदा रखता है, इसकी एक भावुक झलक रविवार को पुखरायां में देखने को मिली। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने अभिन्न मित्र स्वर्गीय सतीश मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त करने सीधे उनके निवास पहुँचे। यहाँ प्रोटोकॉल पीछे छूट गया और एक मित्र का दर्द सामने आ गया।

पुत्रों को दिया आशीर्वाद और भावुक संदेश

पूर्व राष्ट्रपति ने सतीश मिश्र के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उनके दोनों पुत्रों, शांतनु मिश्रा और शंकुल मिश्रा से काफी देर तक बात की। उन्होंने दोनों पुत्रों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और उन्हें सांत्वना देते हुए कहा, “सतीश सिर्फ मेरे मित्र नहीं थे, वह मेरा परिवार थे। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन दुख की इस घड़ी में मैं और मेरा परिवार हर कदम पर तुम्हारे साथ खड़ा है।” पूर्व राष्ट्रपति का यह संदेश सुनकर वहां मौजूद परिजनों और समर्थकों की आंखें भर आईं।

सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच उमड़ा जनसैलाब

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे कस्बे में सुरक्षा का सख्त घेरा रहा। इंस्पेक्टर सीमा सिंह, थानाध्यक्ष कालीचरण, उपनिरीक्षक सुमन दीक्षित और कांस्टेबल रमा देवी सहित पुलिस बल ने सुरक्षा की कमान संभाली। इस अवसर पर विधायक महेश त्रिवेदी, विनोद कटियार, पूर्व वन अधिकारी संतोष त्रिपाठी, कैलाश नारायण दीक्षित, गौरव मिश्रा, विनोद कुमार मिश्रा, अनुज अग्निहोत्री, डॉ. जय गोयल, अमित, सुनीत और गौरव मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने पूर्व राष्ट्रपति की सादगी और उनकी गहरी मित्रता की सराहना की।

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