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परिषदीय स्कूलों में सत्र 2026-27 के लिए रसोइयों के नवीनीकरण हेतु आधिकारिक आदेश जारी

परिषदीय विद्यालयों में प्रधानमंत्री पोषण (पीएम पोषण) योजना के तहत रसोइयों का चयन विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से किया जाएगा। वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश में 353536 रसोइयों को मंजूरी दी गई है

कानपुर देहात। परिषदीय विद्यालयों में प्रधानमंत्री पोषण (पीएम पोषण) योजना के तहत रसोइयों का चयन विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से किया जाएगा। वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश में 353536 रसोइयों को मंजूरी दी गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को शासनादेश के अनुरूप चयन प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 15 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी कर उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए कहा गया है। प्रत्येक विद्यालय में नामांकित छात्रों की संख्या के आधार पर ही रसोइयों की संख्या तय होगी। निर्धारित मानक के अनुसार 25 तक छात्रों वाले विद्यालय में दो, 26 से 100 छात्रों पर तीन, 101 से 200 छात्रों पर चार, 201 से 300 छात्रों पर पांच, 301 से 1000 छात्रों पर छह और 1001 से 1500 छात्रों वाले विद्यालयों में सात रसोइयों का चयन किया जाएगा। इससे अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में शासनादेश के अन्य प्रावधानों के अनुसार रसोइयों की नियुक्ति होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यालयवार छात्र संख्या का सत्यापन कर पात्र विद्यालयों में चयन प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी कराएं। रसोइयों को रखे जाने से पीएम पोषण योजना के तहत मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
15 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया-
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी बीएसए अपने जिले में विद्यालयवार छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन करें। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। अधिकारियों को यह कार्य अगले 15 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजनी होगी ताकि रसोइयों की नियुक्ति जल्द सुनिश्चित हो सके। बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने कहा कि विद्यालयों में रसोइयों की पर्याप्त संख्या होने से भोजन बनाने की प्रक्रिया में स्वच्छता और समयबद्धता बनी रहेगी। इससे न केवल मिड-डे मील की व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी बल्कि बच्चों को ताजा और गर्म भोजन मिलने में भी आसानी होगी। इस निर्णय से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और शिक्षा प्रणाली में सहयोग करने वाले कर्मियों का ढांचा और अधिक मजबूत होगा।

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