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फास्ट इन फर्स्ट आउट फार्मूले से हटेंगे वरिष्ठ शिक्षक, हाई कोर्ट ने सभी जनपदों के बीएसए से वरिष्ठता के क्रम में मांगी सूची 

आरटीई एक्ट के तहत कई प्रधानाध्यापकों के होंगे स्थानांतरण

राजेश कटियार , कानपुर देहात। सरप्लस शिक्षकों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी 3जिलों से विस्तृत जानकारी तलब की है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों, शून्य शिक्षक और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों का जनपदवार विवरण चार निर्धारित प्रारूपों में तैयार कर चार जुलाई तक ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए। यह कार्यवाही सौरभ कुमार सिंह व छह अन्य बनाम उत्तर प्रदेश व अन्य विशेष अपील के तहत की जा रही है जिसकी अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।

हाईकोर्ट ने तीन जुलाई की सुनवाई के दौरान प्रदेशवार विस्तृत डाटा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक भी की। साथ ही सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से तत्काल सूचना मांगी गई है। पहले प्रारूप में प्राथमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों का विवरण, दूसरे में उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विषयवार सरप्लस शिक्षकों का ब्योरा, तीसरे में प्राथमिक विद्यालयों के शून्य व एकल शिक्षक वाले स्कूलों तथा चौथे में उच्च प्राथमिक विद्यालयों के ऐसे विद्यालयों का विवरण देना होगा। प्रत्येक प्रारूप में विद्यालय का नाम, छात्र संख्या, स्वीकृत व कार्यरत शिक्षक, कार्यरत स्कूल में ज्वाइनिंग तिथि, आरटीई के अनुसार आवश्यक शिक्षक और संबंधित शिक्षकों का पूरा ब्योरा शामिल रहेगा ताकि हाईकोर्ट में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। बताते चलें बेसिक शिक्षा विभाग के आरटीई एक्ट के अनुसार जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 150 से कम एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 100 से कम होती है तो वहां प्रधानाध्यापक का पद नहीं माना जाता। ऐसे स्कूलों से मूल प्रधानाध्यापकों को हटाकर (सरप्लस/अधिशेष मानकर) उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां उनकी आवश्यकता है और पुराने स्कूल का कार्यभार सहायक अध्यापकों में से किसी एक वरिष्ठ शिक्षक को इंचार्ज के रूप में सौंपा जाएगा।

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