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भारत उत्थान न्यास ने शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर आयोजित की गोष्ठी

आज भारत उत्थान न्यास आध्यात्म विभाग द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य का जीवन दर्शन विषय पर अंतरराष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कानपुर देहात,सुशील त्रिवेदी : आज भारत उत्थान न्यास आध्यात्म विभाग द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य का जीवन दर्शन विषय पर अंतरराष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ आशा तिवारी द्वारा प्रस्तुत भजन से हुआ। डॉ आनंदेश्वरी अवस्थी ने सभी अतिथियों और श्रोताओं का स्वागत अपने भाषण के माध्यम से किया। संगोष्ठी को पद्मश्री विद्या बिन्दु सिंह जी का   मार्गदर्शन और आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। मुख्य वक्ता महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय भोपाल के आचार्य डॉ निलिप्त त्रिपाठी ने ओजस्वी भाषण देते हुए भगवान शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर अपने विचार व्यक्त कर उपस्थित सभी श्रोताओं का मार्गदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि विश्वकल्याण की चेतना का विकास करने और प्राचीन भारतीय जीवन शैली और मूल्यों को व्यवहारिक जीवन में अपनाने से समस्त मानव जाति का भला होगा। विशिष्ट अतिथि इंडियन एंड एशियाई नृत्य विभाग एवं नाट्य कला संकाय यूनिवर्सिटी ऑफ द विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स कोलंबो श्रीलंका की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ अंजली मिश्रा ने बताया कि भावी पीढ़ी को प्राचीन जीवन शैली से जोड़ने की आवश्यकता है जिससे उनके अंदर संस्कार शोधन की प्रक्रिया शुरू हो सके। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड निवासी और राजभाषा के पूर्व निदेशक डॉ राजेश्वर उनियाल ने कहा भगवान शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठों के माध्यम से सनातन संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित है तो उसके पीछे सिर्फ आदि गुरु शंकराचार्य की दूरदर्शिता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि उनके द्वारा प्रदान ज्ञान को हम सनातनी लोग अपने जीवन में धारण करें जिससे संपूर्ण मानव जाति का कल्याण हो। इसी क्रम में शोधार्थी शिवम गुप्ता ने अपने शोध पत्र का वाचन किया। मंच संचालन न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुजीत कुंतल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन न्यास की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ शशि अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर आध्यात्म समिति की राष्ट्रीय सचिव रमा चतुर्वेदी व न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ राम रानी पालीवाल, निवेदिता चतुर्वेदी, पूजा श्रीवास्तव, डॉ. के स्वर्णा, वीरेन्द्र ठाकुर, कंचन कौशिका, डॉ मृदुला रस्तोगी आदि उपस्थित रहे।

 

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