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यूपी के बेसिक शिक्षकों ने ठुकराया सरकार का सम्मान, 19 जिलों के आंकड़े जान रह जाएंगे हैरान

राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए नहीं दिखा उत्साह, कई जिलों में शून्य तो कई में आया महज 1 आवेदन, विभाग ने बढ़ाई आखिरी तारीख

राजेश कटियार, लखनऊ/ कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘राज्य अध्यापक पुरस्कार’ को लेकर इस बार शिक्षकों में बिल्कुल भी उत्साह नजर नहीं आ रहा है। हालात इस कदर चौंकाने वाले हैं कि प्रदेश के 19 जिलों से अब तक एक भी शिक्षक ने इसके लिए फॉर्म नहीं भरा है, जबकि 22 जिलों का आंकड़ा महज एक-एक आवेदन पर आकर सिमट गया है। शिक्षकों की इस भारी उदासीनता और खाली पड़े आवेदनों को देखते हुए विभाग में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद आनन-फानन में आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 7 जुलाई कर दिया गया है।

इन 19 जिलों में नहीं मिला एक भी दावेदार, 22 जिलों में सिर्फ एक आवेदन

विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, यूपी के 19 जिलों में फाइनल सबमिशन का आंकड़ा पूरी तरह शून्य (जीरो) रहा। इनमें औरैया, बांदा, बरेली, बिजनौर, बदायूं, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, हरदोई, हाथरस, कन्नौज, ललितपुर, महोबा, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर, संभल, शामली और सोनभद्र शामिल हैं। वहीं कानपुर देहात, कानपुर नगर, झांसी, जौनपुर, जालौन, हापुड़, हमीरपुर, गोरखपुर, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, इटावा, एटा, देवरिया, चंदौली, बुलंदशहर, भदोही, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, बागपत, अमरोहा और अमेठी जैसे 22 जनपदों से सिर्फ एक-एक आवेदन ही प्राप्त हुआ है। पूरे प्रदेश में सर्वाधिक 5 आवेदन करने वाला एकमात्र जिला प्रयागराज रहा।

कड़े नियम, राजनीतिक बयानबाजी और टेट की अनिवार्यता से व्यथित हैं शिक्षक

आखिर शिक्षक इस बड़े सरकारी सम्मान से दूरी क्यों बना रहे हैं, इसकी कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। शिक्षकों का मानना है कि पुरस्कार के लिए विभाग द्वारा तय किए गए नियम और शर्तें इतनी कड़ी हैं कि सामान्य परिस्थितियों में उन्हें पूरा करना बेहद जटिल काम है। इसके अलावा शिक्षकों के एक बड़े वर्ग में यह धारणा भी घर कर चुकी है कि इन पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी होती है और अक्सर सिफारिशें हावी रहती हैं। पूर्व में मंचों पर हुए विवादों, राजनीतिक बयानों और तानाशाही तरीके से टेट (TET) परीक्षा की अनिवार्यता लागू किए जाने से स्वाभिमानी शिक्षक खासे आहत हैं और यही वजह है कि वे इस प्रक्रिया में रुचि नहीं ले रहे हैं।

कानपुर देहात के बीएसए ने मातहतों को दिए निर्देश

इस बेहद लचर स्थिति को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। बीएसए ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने ब्लॉक के योग्य और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों से संपर्क करें, उन्हें पुरस्कार के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें और हर हाल में समय सीमा के भीतर आवेदन सुनिश्चित कराएं।


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