उत्तरप्रदेशकानपुर देहातफ्रेश न्यूज

श्रीरामजानकी आश्रम में कंस वध और रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, महंत ने किया कथावाचकों का सम्मान

जनपद के ग्राम गौरियापुर स्थित श्रीरामजानकी आश्रम में अधिमास के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के छठवें दिवस में आज श्रीभागवत पुराण की मनोहारी कथाओं का सुंदर वर्णन किया गया। आज आश्रम के महंत श्रीदेवनारायण दास जी ने भी भागवताचार्यो का माल्यार्पण करके सम्मान किया

कानपुर देहात। जनपद के ग्राम गौरियापुर स्थित श्रीरामजानकी आश्रम में अधिमास के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के छठवें दिवस में आज श्रीभागवत पुराण की मनोहारी कथाओं का सुंदर वर्णन किया गया। आज आश्रम के महंत श्रीदेवनारायण दास जी ने भी भागवताचार्यो का माल्यार्पण करके सम्मान किया। आश्रम परिसर में स्थित सद्गुरू सदन नामक हाल में गत पांच दिवस से चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण की मनोरम कथा के अन्तर्गत आज कंस वध, रुक्मणी विवाह आदि भगवान कृष्ण के अनेक सुन्दर प्रसंगों का दिव्य वर्णन सुनकर के समस्त भक्त समुदाय आनंदित हुआ। भागवत के प्रमुख व्यास जनपद उन्नाव के निवासी पंडित सदाशिव तिवारी जो संस्कृत महाविद्यालय गौरियापुर के पूर्व छात्र भी हैं ने भागवत कथा के क्रम में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस कंस का वध करके ब्रजमंडल का संकट दूर करके सभी को संरक्षण प्रदान किया। जब कंस के अत्याचारों से सभी सज्जन शक्तियां दुखी और त्रस्त हो रही थी जब उनको कोई अवलंब नहीं दिखाई दे रहा था, भविष्य अंधकारमय दिख रहा था जब सभी अपने अपने प्रयास करके हार चुके थे तब उनको परमपिता परमेश्वर का स्मरण हुआ और उन दुखित जनों की आर्त पुकार सुनकर के भगवान् श्रीकृष्ण के रूप में परब्रह्म का अवतार हुआ और कंस वध के साथ समस्त मानवता का कष्ट दुख हमेशा के लिए समाप्त हो गया।

श्री व्यास जी ने बताया कि जब मनुष्य अपनी समस्त शक्तियां लगा करके भी संकटों से मुक्ति नहीं प्राप्त कर पाता है, तब उसको ईश्वर की ही याद आती है और इस अवस्था में ही वह हृदय से आर्त पुकार करता है, उसका मन भयभीत तब वह केवल ईश्वर को ही पुकारता है और भगवान उसकी पुकार सुनकर इस धरा धाम पर अवतरित होकर कष्ट दूर करते हैं हैं। द्वितीय व्यास पं. अनुराग पांडेय ने कथा क्रम में रुक्मणी के विवाह की सुंदर कथा का वर्णन किया उन्होंने कहा कि जब भगवान ने ब्रजमंडल की समस्त समस्याओं समापन कर दिया तब भगवान ने गृहस्थ जीवन में प्रवेश हेतु रुक्मणी से प्रथम विवाह किया।रुक्मणी की इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह अन्यत्र हो रहा था। तब रुक्मणी की पुकार पर भगवान ने स्वयं सामने आकर के रुक्मणी के साथ विवाह किया और रुक्मणी का उद्धार किया। आज कथा के बीच आश्रम के महंत श्री देवनारायण दास जी ने दोनों भगवतव्यासों का माल्यार्पण करके सम्मान किया। साथ ही संस्कृत विद्यालय के प्रवक्ता योगेश्वर अवस्थी, मोहम्मदपुर निवासी पप्पू शुक्ला, अकबरपुर निवासी पप्पू द्विवेदी ने भी कथा वाचकों का माल्यार्पण करके सम्मानित किया। कथा परीक्षित के रूप रूप में बनीपारा के रज्जू भैया, गौरियापुर के मोतीलाल, कानपुर के सुरेश अग्निहोत्री पत्नी के साथ निरंतर उपस्थित रहे ।साथ ही ग्राम गौरिया पुर व क्षेत्रीय भक्तजन स्त्री पुरुष सायंकाल तक कथा श्रवण करते रहे। आरती प्रसाद के साथ आज की कथा विश्राम हो गया।

Related Articles

AD
Back to top button