सरप्लस शिक्षकों के समायोजन केस की 20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

प्रयागराज/कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों के समायोजन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को अधिशेष (सरप्लस) घोषित करने से पहले शिक्षक-छात्र अनुपात (PTR) एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य सरकार को विद्यालयवार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार को तीन अलग-अलग सूची तैयार करने के निर्देश-
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश के विद्यालयों का डेटा तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रकाशित करने का आदेश दिया है। पहली सूची में ऐसे विद्यालय जहां कोई भी शिक्षक सरप्लस नहीं हैं।दूसरी सूची में ऐसे विद्यालय जहां शिक्षक अधिशेष पाए गए हैं और उनका समायोजन प्रस्तावित है। तीसरी सूची में प्रदेश के 16986 ऐसे विद्यालय जहां शिक्षकों की कमी है और समायोजन के माध्यम से वहां भेजा जायेगा। इसके साथ ही तीसरी सूची को भी दो भागों में विभाजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन विद्यालयों में न्यूनतम दो शिक्षक उपलब्ध कराए जाने हैं तथा किन विद्यालयों में अन्य रिक्त पदों को भरा जाना है।
प्रत्येक विद्यालय की यह जानकारी होगी सार्वजनिक-
न्यायालय ने कहा है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल पर प्रत्येक विद्यालय से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रकाशित की जाए। इसमें निम्न विवरण शामिल होंगे-जनपद एवं विकासखंड का नाम, विद्यालय का नाम, आरटीई के अनुसार स्वीकृत शिक्षक पद, वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों के नाम, प्रत्येक शिक्षक की कार्यरत विद्यालय में कार्यग्रहण (ज्वाइनिंग) तिथि, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार विवरण, 30 अप्रैल 2026 तक विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, आरटीई के अनुसार आवश्यक शिक्षकों की संख्या, यदि कोई शिक्षक अधिशेष (सरप्लस) घोषित किया गया है तो उसका नाम, विषय श्रेणी।
शिक्षक कर सकेंगे आपत्ति दर्ज-
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले सरकार अधिशेष शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करेगी। इसके बाद संबंधित शिक्षक यदि स्वयं को गलत तरीके से सरप्लस घोषित किया गया मानते हैं तो वे अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य सूचियों में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर भी आपत्ति प्रस्तुत की जा सकेगी।
महत्वपूर्ण तिथियां-
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा शपथपत्र सहित सूची प्रस्तुत करना-
13 जुलाई 2026
आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि- 17 जुलाई 2026
अगली सुनवाई-
20 जुलाई 2026
अंतरिम आदेश रहेगा प्रभावी-
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले से लागू अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा अर्थात अंतिम निर्णय आने तक पूर्व व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।
कौन होगा सरप्लस-
सरप्लस शिक्षकों के समायोजन और ट्रांसफर के लिए फर्स्ट इन-फर्स्ट ऑउट नियम का पालन करने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय में जो प्रधानाध्यापक या सहायक अध्यापक सबसे वरिष्ठ (विद्यालय में कार्यभार ग्रहण तिथि के अनुसार) होगा वही सरप्लस होगा। प्राथमिक विद्यालयों में 150 से कम छात्र संख्या होने पर प्रधानाध्यापक का पद शून्य माना जायेगा और उन्हें सरप्लस (अतिरिक्त) माना जाएगा। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से कम छात्र संख्या होने पर प्रधानाध्यापक का पद शून्य माना जायेगा और उन्हें सरप्लस (अतिरिक्त) माना जाएगा।
हेड टीचर समायोजन पर भी सुनवाई की संभावना-
हेड शिक्षकों के समायोजन से संबंधित आवेदन भी न्यायालय के समक्ष लंबित है। ऐसे में जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ चुकी है अथवा विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता में परिवर्तन हुआ है वे संबंधित शिक्षक समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सकते हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश का उद्देश्य शिक्षक समायोजन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तथ्य आधारित बनाना है। विद्यालयवार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक होने से प्रत्येक शिक्षक यह समझ सकेगा कि उसे किस आधार पर अधिशेष (सरप्लस) घोषित किया गया है तथा आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा सकेगा। इससे समायोजन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होने की उम्मीद है।



