कानपुर नगर में बड़ी कार्रवाई: डीएम के औचक निरीक्षण में 13 कर्मचारी अनुपस्थित, वेतन रोका; लापरवाही पर जताई कड़ी नाराजगी
कल्याणपुर ब्लॉक कार्यालय में फैली गंदगी और अव्यवस्था पर जिलाधिकारी का सख्त रुख, कई अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

कानपुर नगर: जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने आज सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कल्याणपुर ब्लॉक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह के वक्त जब कार्यालय में कामकाज शुरू होना था, अचानक जिलाधिकारी के पहुँचने से अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जो कुछ देखा, उससे वे बेहद नाराज़ हुए। कार्यालय परिसर में जगह-जगह अव्यवस्था, धूल-मिट्टी और गंदगी फैली हुई थी, जो सरकारी कामकाज में व्याप्त लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शा रही थी।
जिलाधिकारी ने पाया कि न केवल कार्यालय परिसर में साफ-सफाई का अभाव था, बल्कि कर्मचारियों की उपस्थिति भी निराशाजनक थी। उन्होंने उपस्थिति पंजिका की जाँच की और पाया कि 13 कर्मचारी अनुपस्थित थे। इस बड़ी लापरवाही को देखकर जिलाधिकारी ने तत्काल इन सभी कर्मचारियों का उस दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के अनुपस्थिति और कार्य के प्रति लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जो कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, उनमें चार नियमित कर्मचारी और नौ संविदाकर्मी शामिल थे। नियमित कर्मचारियों में दिनेश कुमार यादव, प्रिया मिश्रा, साधना यादव और जीतू आर्या गैरहाज़िर थे। वहीं, संविदा कर्मचारियों में प्रिया शुक्ला, पंकज शर्मा, दीपक कुमार, सत्यम तिवारी, शिशिर कुमार, कृष्णा पाल, आनंद सिंह और नैन्सी मिश्रा अपने काम पर नहीं आए थे। इसके अलावा, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) कार्यालय से राजकमल अवस्थी भी अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन सभी का अनुपस्थिति दिवस का वेतन उनकी अनुमति के बिना आहरित न किया जाए। यह कार्रवाई सरकारी दफ्तरों में व्याप्त अनियमितताओं पर एक कड़ा संदेश है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यालय की ‘भ्रमण पंजिका’ (मूवमेंट रजिस्टर) की भी जाँच की। इसमें कई अनियमितताएँ सामने आईं। कर्मियों ने कार्यालय से बाहर जाने की प्रविष्टि तो दर्ज की थी, लेकिन वे वापसी की प्रविष्टि करना भूल गए थे। इस तरह की लापरवाही सरकारी कामकाज में जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। जिलाधिकारी ने इस पर खंड विकास अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें तीन दिन के भीतर इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एक बोर टेक्नीशियन से उनके कार्यों के बारे में पूछा, लेकिन वह अपने काम का कोई संतोषजनक विवरण नहीं दे सका। इससे नाराज होकर, जिलाधिकारी ने सहायक अभियंता, लघु सिंचाई से तत्काल विकास खंडवार उनके कार्यों का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा। यह दिखाता है कि जिलाधिकारी न केवल उपस्थिति बल्कि काम की गुणवत्ता पर भी नजर रख रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने कार्यालय के विभिन्न कक्षों का भी निरीक्षण किया। एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) और लेखा कक्ष सहित कई दफ्तरों में भी गंदगी और अव्यवस्था का आलम था। फाइलों का ढेर, मकड़जाल और धूल से ढके हुए फर्नीचर सरकारी कार्यप्रणाली की उदासीनता को उजागर कर रहे थे।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने केवल कार्रवाई करके ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (DRDA) को एक सप्ताह के भीतर तथा मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को 15 दिनों के भीतर निरीक्षण कर कार्यालय की व्यवस्थाओं पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इन रिपोर्टों के बाद वे स्वयं पुनः निरीक्षण करने आएंगे। यह चेतावनी अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि यदि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
यह औचक निरीक्षण सरकारी तंत्र में जवाबदेही और अनुशासन को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी की इस सख्ती से न केवल कल्याणपुर ब्लॉक कार्यालय, बल्कि जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी खलबली मची है। यह कार्रवाई जनहित में कार्य करने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उम्मीद है कि इस तरह के निरीक्षण से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता आएगी, जिससे आम जनता को बेहतर सेवाएँ मिल सकेंगी।
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