वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है: राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला
क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए इस गीत को ऊर्जा का स्रोत बताया।

लखनऊ/ कानपुर देहात। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री व सदर विधायक अकबरपुर रनिया प्रतिभा शुक्ला ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सदन में भावपूर्ण और ओजस्वी वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, सांस्कृतिक चेतना और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक शक्ति है, जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े राष्ट्र को आत्मसम्मान के साथ खड़े होना सिखाया। राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि वर्ष 1875 में राष्ट्रकवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा था, किंतु कालांतर में यह पूरे देश की सामूहिक आवाज बन गया।
जब पराधीन भारत में स्वतंत्रता की बात करना भी अपराध माना जाता था, तब इसी गीत ने देशवासियों को यह चेतना दी कि मातृभूमि केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि माँ के समान पूजनीय है। मंत्री प्रतिभा शुक्ला कहा कि वंदे मातरम् की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें राष्ट्र को माता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है—एक ऐसी माता, जो सभी संतानों को समान स्नेह देती है और त्याग, तपस्या तथा करुणा की प्रतिमूर्ति है। सदन में अपने वक्तव्य के दौरान राज्यमंत्री ने कहा, “जब भी वंदे मातरम् गाया जाता है, तो मन में यह भाव जागृत होता है कि मैं भारत माता की पुत्री हूँ और राष्ट्रसेवा मेरा सर्वोच्च कर्तव्य है।”
मंत्री प्रतिभा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वंदे मातरम् क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणास्रोत रहा है। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर देशव्यापी आंदोलनों तक, इस गीत ने जन-जन में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। अंग्रेजी शासन इस गीत से भयभीत था और कई स्थानों पर इसके गायन पर प्रतिबंध लगाया गया, किंतु जिस स्वर को दबाने का प्रयास किया गया, वही स्वर आगे चलकर स्वतंत्र भारत की नींव बना। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी निरंतर भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों को देश की एकता और आत्मविश्वास की आधारशिला बताते आए हैं।
वंदे मातरम् जैसे गीत राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और समरसता की भावना को सुदृढ़ करते हैं, जो एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा हैं। राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि आज जब भारत विश्व मंच पर एक आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, तब वंदे मातरम् यह स्मरण कराता है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा हो। 150 वर्षों बाद भी इस गीत की प्रासंगिकता अक्षुण्ण है और यह हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, कर्तव्य को अधिकारों से पहले मानने और एकता को अपनी सबसे बड़ी शक्ति समझने की सीख देता है।
अंत में उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है। इसे केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए इसके भाव को नीतियों, निर्णयों और सार्वजनिक आचरण में उतारने की आवश्यकता है। मातृभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा, राष्ट्रीय एकता में अडिग विश्वास और भारत के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ उन्होंने वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया।
ये भी पढ़े- कानपुर देहात: माती के इको पार्क में कैरियर मार्गदर्शन मेले का आयोजन



