कानपुर देहात: भीषण गर्मी के चलते परिषदीय स्कूलों के संचालन समय में बदलाव की मांग तेज
सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही स्कूल खोलने की शिक्षक संगठनों ने रखी मांग

- नन्हे मुन्ने बच्चों के स्वास्थ्य का दिया हवाला
राजेश कटियार,कानपुर देहात। प्रदेश में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव की मांग तेज हो गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए विद्यालयों का संचालन सुबह के समय किया जाना चाहिए ताकि बच्चों को लू और अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके। उत्तर प्रदेशीय अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष एल बी सिंह ने कहा कि जहां माध्यमिक विद्यालयों के संचालन को लेकर अलग व्यवस्था है वहीं बेसिक विद्यालयों में छोटे बच्चों को भीषण गर्मी के बीच विद्यालय आना पड़ रहा है।
ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तापमान कई जिलों में 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। दोपहर के समय गर्म हवाएं और लू का प्रकोप छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकता है इसलिए विद्यालयों का संचालन सुबह के अपेक्षाकृत ठंडे समय में करना अधिक उपयुक्त रहेगा।
अन्य शिक्षक संगठनों का मानना है कि समय परिवर्तन से न केवल विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा होगी बल्कि उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भीषण गर्मी की वजह से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। अभिभावकों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए बच्चों को राहत मिलनी चाहिए। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का भी कहना है कि जब तक तापमान सामान्य नहीं हो जाता तब तक विद्यालयों के समय में परिवर्तन एक व्यावहारिक और छात्रहितैषी कदम साबित हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश विद्यालयों में आज भी बिजली, पंखे, शुद्ध पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई स्कूलों में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसे में तेज गर्मी के बीच विद्यालय संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब आधुनिक सुविधाओं से लैस निजी स्कूलों में भीषण गर्मी के कारण अवकाश घोषित किया गया है तो बिना पर्याप्त सुविधाओं वाले सरकारी विद्यालयों को खोलने का औचित्य समझ से परे है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अगर स्कूलों को बंद नहीं किया जा सकता है तो समय में परिवर्तन किया जाना चाहिए। वहीं शिक्षकों का भी मानना है कि अत्यधिक तापमान के बीच विद्यालय संचालन बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा सकता है। 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में छोटे बच्चों को लंबे समय तक खुले वातावरण में रखना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। स्कूल के संचालन समय में परिवर्तन किया जाना चाहिए।
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