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साधारण भट्टी से 15 लाख के लोन तक: कानपुर देहात के रवि कुमार ने बॉयलर तकनीक से बदली खोया व्यवसाय की तकदीर

पीएम एफएमई योजना और जिला उद्यान विभाग के सहयोग से होमगार्ड के बेटे ने खड़ी की सफलता की नई इबारत, अब हर दिन 4 कुंतल दूध से तैयार हो रहा उच्च गुणवत्ता वाला खोया

कानपुर देहात: मेहनत, सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलकर कैसे एक साधारण व्यवसाय को आधुनिक उद्योग में बदल सकते हैं, इसकी मिसाल पेश की है जनपद के बादशाहपुर नौहुआ नौगांव के रहने वाले रवि कुमार ने। पिछले 18 वर्षों से दूध व्यवसाय से जुड़े रवि कुमार आज आधुनिक मशीनों के जरिए न केवल अपनी उत्पादन लागत घटाने में सफल रहे हैं, बल्कि बाजार में एक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में उभरे हैं। जिला उद्यान विभाग के अंतर्गत संचालित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित महत्वाकांक्षी योजना पीएम एफएमई (PMFME) के तहत उन्हें ओंकार नाथ सहकारी बैंक द्वारा 15 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसने उनके व्यवसाय को नई उड़ान दी है।

तंगहाली और संघर्षों के बीच हुई शुरुआत

रवि कुमार की पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी संघर्षपूर्ण रही है। उनके पिताजी ने होमगार्ड की नौकरी करके रवि और उनके दो भाइयों का पालन-पोषण किया। इसी बीच माता और एक भाई के असमय निधन के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जिससे रवि केवल हाई स्कूल तक ही शिक्षा प्राप्त कर सके। आजीविका चलाने के लिए वर्ष 2007 में उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ जुड़कर दूध का व्यवसाय सीखा। शुरुआत बेहद साधारण थी—लकड़ी की भट्टी और कढ़ाई पर मैनुअल तरीके से खोया बनाकर वे कानपुर की मंडी में बेचने जाते थे। वर्ष 2016 से उन्होंने स्वयं स्वतंत्र रूप से इस कार्य को आगे बढ़ाना शुरू किया।

बॉयलर तकनीक से बदला काम, आधी हुई ईंधन की खपत

वर्तमान समय में रवि कुमार ने आधुनिकता की राह चुनते हुए राजस्थान से बॉयलर एवं खोया बनाने वाली स्टीम जैकेट वाली विशेष कढ़ाइयां मंगवाकर स्थापित की हैं। अब वे प्रतिदिन लगभग चार कुंतल दूध को प्रोसेस करके एक कुंतल शुद्ध खोया तैयार करते हैं, जिसकी सप्लाई हटिया मंडी कानपुर और नजदीकी स्थानीय बाजारों में की जा रही है। नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जहां पहले प्रति कुंतल दूध से खोया बनाने में 100 किलो लकड़ी जलानी पड़ती थी, वहीं अब सिर्फ 50 किलो लकड़ी में काम हो जाता है। यही नहीं, पहले जहां तीन लेबर लगाने पड़ते थे, अब केवल एक सहायक की मदद से पूरा काम हो जाता है, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आई है। विशेष त्योहारों के सीजन में वे इस क्षमता को बढ़ाकर 150 किलो खोया प्रतिदिन तक ले जाते हैं।

क्वालिटी से कोई समझौता नहीं, किसानों को सीधा लाभ

उत्पाद की शुद्धता बनाए रखने के लिए रवि कुमार किसी बिचौलिए से दूध न खरीदकर सीधे अपने गांव के ही किसानों से दूध का संकलन करते हैं। इस वजह से खोया की गुणवत्ता हमेशा अव्वल रहती है और बाजार में उनकी छवि एक ईमानदार व्यवसायी की बनी हुई है। उनके इसी अच्छे व्यावसायिक और वित्तीय व्यवहार के कारण बैंक से लोन मिलने में भी कोई अड़चन नहीं आई।

अधिकारियों और रिसोर्स पर्सन के सहयोग की सराहना

योजना के अपने अनुभव को साझा करते हुए रवि कुमार ने बताया कि पीएम एफएमई योजना की आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन थी। जिला रिसोर्स पर्सन शिवम त्रिपाठी ने मात्र दो कार्य दिवस के भीतर सभी जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में उनका बेहतरीन सहयोग किया। उन्होंने जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय जाकर अपने सभी अभिलेख जिला उद्यान अधिकारी डॉक्टर बलदेव प्रसाद के समक्ष प्रस्तुत किए थे, जहां से उन्हें पूरा मार्गदर्शन मिला। बैंक ने उनकी पसंद के अनुसार राजस्थान की फर्म के खाते में सीधे धनराशि ट्रांसफर कर मशीनें स्थापित कराईं। रवि कुमार इस पूरी योजना से बेहद संतुष्ट हैं और भविष्य में अपने रिश्तेदारों व परिचितों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए इस योजना से जुड़ने का सुझाव दे रहे हैं।

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