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परिषदीय स्कूलों का समय बदलने की मांग

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय को बदलने के लिए उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मांग की है

Story Highlights
  • तपती गर्मी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जूझ रहीं महिला शिक्षिकाएं

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय को बदलने के लिए उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मांग की है कि स्कूलों की समय सारणी को पूर्व की भांति बहाल किया जाए। संघ का कहना है कि वर्तमान समय व्यवस्था के कारण छोटे बच्चों, महिला शिक्षकों और दूरदराज से आने वाले शिक्षकों को भारी व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कोविड के बाद बदली व्यवस्था की समीक्षा की मांगअपर मुख्य सचिव को भेजे गए आधिकारिक पत्र में संघ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के बाद परिषदीय विद्यालयों के समय में जो बदलाव किए गए थे, उनकी वर्तमान परिस्थितियों में पुनः समीक्षा करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए समय सारणी में सुधार जरूरी है। महिला शिक्षक संघ ने बदलती जलवायु और प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए गर्मी के दिनों में (ग्रीष्मकाल) सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक। ठंड के दिनों में (शीतकाल) सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक करने का अनुरोध किया है।
लंबी यात्रा और घरेलू मोर्चे पर जूझ रहीं शिक्षिकाएं-
पत्र में महिला शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा गया है कि वर्तमान समय-सारणी के कारण शिक्षिकाओं को अत्यधिक गर्मी, लंबी यात्रा और पारिवारिक दायित्वों के चलते कई मोर्चों पर एक साथ संघर्ष करना पड़ता है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने-जाने वाले शिक्षकों के लिए भी वर्तमान समय अनुकूल नहीं है। छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ेगा असरडॉ. सुलोचना मौर्य ने तर्क दिया कि यदि शासन इस प्रस्तावित समय-सारणी को मंजूरी देता है तो इसके कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे:दोपहर की भीषण तपिश से पहले छुट्टी होने से छोटे बच्चों को राहत मिलेगी।विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति में सुधार होगा।शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और शिक्षण-अधिगम का स्तर बेहतर होगा।
शासन से त्वरित फैसले की उम्मीद-
महिला शिक्षक संघ ने शासन से अनुरोध किया है कि प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द संशोधित शासनादेश या दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

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