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निजी दुश्मनी निकालने के लिए नहीं हो न्याय प्रक्रिया का इस्तेमाल : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निजी दुश्मनी निकालने के लिए न्याय प्रणाली का इस्तेमाल न करने का सख्त आदेश दिया और कहा कि बेकार की याचिकाओं में कमी लाना प्रभावी न्यायिक प्रणाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है जहां अधीनस्थ अदालतों में 70 फीसद मामले लंबित हैं।

नई दिल्ली,अमन यात्रा : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कहा कि निजी दुश्मनी निकालने के हथियार के तौर पर न्याय प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। बेकार की याचिकाओं में कमी लाना प्रभावी न्यायिक प्रणाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है जहां अधीनस्थ अदालतों में 70 फीसद मामले लंबित हैं।

जस्टिस एमएम शांतनागौदर और जस्टिस आरएस रेड्डी की पीठ ने कहा कि देश में फालतू की याचिकाओं का चलन नहीं बनना चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से आरोपित बनाए गए व्यक्ति को न सिर्फ पैसों का नुकसान होता है बल्कि समाज में उसे बदनामी का भी सामना करना पड़ता है। पीठ ने कहा कि निचली अदालतों का दायित्व है कि वे उचित मामलों में आरोपित को बरी करके फालतू की याचिकाओं को मुकदमे के चरण में ही रोक देना चाहिए।

बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण फैली कोविड-19 महामारी के कारण पिछले साल मार्च से सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामलों की सुनवाई हो रही है। कई बार निकाय और अधिवक्ता लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि मामलों की प्रत्यक्ष तरीके से सुनवाई तत्काल शुरू की जाए।

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