कानपुर देहात: मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में संपन्न हुआ किसान दिवस
सभी अधिकारी व कर्मचारी नियमित रूप से क्षेत्र में रहकर किसानों से जीवंत संवाद बनाए रखें: मुख्य विकास अधिकारी
कानपुर देहात: शासन के मंशानुरूप अन्नदाताओं की आय में वृद्धि करने, उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने तथा उन्हें आधुनिक व उन्नत कृषि तकनीकों से आच्छादित करने के उद्देश्य से प्रत्येक माह के तृतीय बुधवार को आयोजित होने वाले ‘किसान दिवस’ का आयोजन आज विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक हरिशंकर भार्गव, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत व डॉ. खलील खान, अग्रणी जिला प्रबंधक, जिला कृषि अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी सहित कृषि एवं संबद्ध विभागों के समस्त जनपद स्तरीय अधिकारी तथा विभिन्न विकास खंडों से आए प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समस्त किसान भाइयों से अपील की कि वे अपनी फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से कराएं। उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितताओं एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, जलभराव, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि अथवा आकाशीय बिजली से फसलों को होने वाले नुकसान की स्थिति में यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है और बीमित कृषकों को नियमानुसार समय पर उचित आर्थिक क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही उन्होंने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी, बीज अनुदान एवं यंत्रीकरण योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए किसानों से विभागीय योजनाओं से जुड़कर आधुनिक खेती अपनाने का आह्वान किया। मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि सभी अधिकारी व कर्मचारी नियमित रूप से क्षेत्र में रहकर किसानों से जीवंत संवाद बनाए रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद में किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त बीज, उर्वरक व अन्य कृषि निवेश समय से उपलब्ध कराए जाएं तथा किसी भी दशा में उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री (ओवररेटिंग) न होने पाए।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने वर्षा ऋतु एवं अत्यधिक उमस के मौसम में पशु स्वास्थ्य एवं प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि इस मौसम में पशुओं में पेट संबंधी विकार, बाह्य व आंतरिक परजीवी संक्रमण तथा खुरपका-मुंहपका एवं गलघोंटू जैसी संक्रामक बीमारियों की आशंका काफी बढ़ जाती है। उन्होंने पशुपालकों को स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था रखने, संतुलित आहार के रूप में हरे चारे का वैज्ञानिक अनुपात में उपयोग करने तथा पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे निःशुल्क टीकाकरण अभियानों का शत-प्रतिशत लाभ उठाने की सलाह दी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा भी पशुधन विकास, कृत्रिम गर्भाधान, पशु क्रेडिट कार्ड एवं दुग्ध उत्पादन प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने किसानों को खेती की लागत घटाकर शुद्ध आय में वृद्धि करने के व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक उपाय बताए। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की महत्ता पर बल देते हुए संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खादों के समावेश तथा समयबद्ध खरपतवार नियंत्रण के तरीके समझाए। खरीफ फसलों, विशेषकर धान में लगने वाले हानिकारक कीटों जैसे पत्ती लपेटक एवं तना छेदक कीट की समय पर पहचान व उनके समन्वित कीट प्रबंधन की तकनीकों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने किसानों को असली व नकली खादों की पहचान करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए। डॉ. खान ने आकस्मिक फसल योजना के अंतर्गत परामर्श दिया कि कम वर्षा अथवा मुख्य फसल की बुवाई प्रभावित होने की दशा में किसान खाली खेतों में कम समय में तैयार होने वाली तोरिया की उन्नत खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं।
इसी क्रम में उप कृषि निदेशक हरिशंकर भार्गव एवं जिला उद्यान अधिकारी सहित अन्य संबद्ध विभागों के अधिकारियों द्वारा औद्यानिक फसलों, फल-सब्जी उत्पादन, मसाला एवं औषधीय फसलों की खेती, संरक्षित खेती (पॉलीहाउस) तथा सूक्ष्म सिंचाई पद्धति (ड्रिप व स्प्रिंकलर) पर उपलब्ध शासकीय अनुदान व तकनीकी लाभों की विस्तृत रूपरेखा किसानों के समक्ष रखी गई। मुख्य विकास अधिकारी ने अंत में सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार स्थानीय संचार माध्यमों एवं संदेश समूहों के जरिए ग्राम स्तर तक कराया जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र किसान को योजनाओं का सीधा व शत-प्रतिशत लाभ प्राप्त हो सके।



