कानपुर: सावधान! एआई वाली ‘सुंदर दुल्हन’ का खतरनाक खेल, सात फेरों के नाम पर ऐसे उड़ाए लाखों
खूबसूरत डीपी देखकर शादी के लिए हां करने से पहले पढ़ लें कानपुर की यह खौफनाक खबर, एआई के जाल में फंसे दर्जनों कुंवारे लड़के

- कानपुर पुलिस ने एआई तकनीक से लड़कों को जाल में फंसाने वाले फर्जी मैट्रिमोनी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया.
- इंटरनेट से युवतियों की तस्वीरें चुराकर एआई टूल्स से हुस्न का मायाजाल बुनते थे शातिर ठग.
- मुख्य सरगना रंजीश कुमार गौड़ गिरफ्तार, 23 महिला टेलीकॉलर्स से पूछताछ और 10 बैंक खाते सीज.
कानपुर: अगर आप भी ऑनलाइन मैट्रिमोनी साइट्स या सोशल मीडिया पर अपने लिए परफेक्ट जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, तो रुकिए! कानपुर नगर की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के शातिर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दम पर कुंवारे लड़कों को अपना शिकार बना रहा था. यह गिरोह ‘परफेक्ट रिश्ते’, ‘शादी मैच इंडिया’ और ‘शादी मैच मैट्रिमोनी’ जैसी फर्जी कंपनियों के नाम पर बाकायदा एक बड़ा कॉल सेंटर चला रहा था, जहां से लड़कों को शादी का झांसा देकर लाखों की चपत लगाई जा रही थी. चन्देश नामक एक पीड़ित से करीब 4 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी होने के बाद जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, तो इस रोंगटे खड़े कर देने वाले खेल का खुलासा हुआ.
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। शातिर ठग इंटरनेट और सोशल मीडिया से आम युवतियों की तस्वीरें चुपके से डाउनलोड कर लेते थे. इसके बाद आधुनिक एआई तकनीक और एडवांस फोटो एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके उन तस्वीरों को इतना आकर्षक और जादुई बना दिया जाता था कि कोई भी पहली नजर में धोखा खा जाए. इन फर्जी प्रोफाइल को असली शादी का प्रस्ताव बताकर अविवाहित युवकों को भेजा जाता था. जैसे ही कोई युवक इस हुस्न के जाल में फंसता, कॉल सेंटर में बैठी महिला टेलीकॉलर्स खुद को बड़ी मैरिज काउंसलर या रिलेशनशिप एडवाइजर बताकर उनसे बात करना शुरू कर देती थीं. बातचीत के दौरान पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें मनगढ़ंत स्क्रिप्ट के आधार पर मीठी-मीठी बातों में उलझाया जाता था.
भरोसा मजबूत होते ही प्रोफाइल निर्माण शुल्क, मैरिज मैचिंग फीस, लड़की का संपर्क विवरण देने का चार्ज और सुरक्षा राशि के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों व यूपीआई आईडी में मोटी रकम ट्रांसफर करा ली जाती थी. हद तो तब हो गई जब लड़कों को झांसा देने के लिए ये ठग ‘प्रैंक पेमेंट’ ऐप के जरिए नकली रसीदें और फर्जी भुगतान के स्क्रीनशॉट बनाकर भेजते थे ताकि लड़कों को लगे कि लड़की वाले भी पैसे जमा कर रहे हैं. जब कोई पीड़ित खुद को ठगा हुआ महसूस कर पुलिस में शिकायत की धमकी देता, तो ये लोग उसे डराने और मामला रफा-दफा करने के लिए आंशिक पैसे वापस करने की नई चाल चलते थे ताकि उनके बैंक खाते फ्रीज होने से बच सकें.
पुलिस उपायुक्त अपराध के कुशल निर्देशन में साइबर थाना पुलिस की टीम ने सटीक सूचना पर बर्रा और यशोदा नगर इलाके में छापेमारी की. इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी मुख्य सरगना रंजीश कुमार गौड़ को धर दबोचा, जबकि अमित, करम पटेल और जागृति नामक मुख्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी है. मौके से पुलिस ने ठगी के काम में लगी 23 महिला टेलीकॉलर्स को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. इस गिरोह के पास से विभिन्न बैंकों के 10 एक्टिव खाते, भारी मात्रा में मोबाइल डेटा, व्हाट्सएप चैट, फर्जी प्रोफाइल और कॉलिंग रिकॉर्ड जैसे अकाट्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिससे देशव्यापी स्तर पर हुई करोड़ों की ठगी के राजफाश होने की उम्मीद है.



