कानपुर देहात: सरकारी स्कूलों में विद्यालय प्रबंधन समितियों के पुनर्गठन का ऐलान, 1 नवंबर से शुरू होगी प्रक्रिया
प्रत्येक विद्यालय प्रबंधन समिति में कुल 15 सदस्य होंगे जिन्हें दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश सरकार ने नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राज्य नियमावली 2011 के तहत प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समितियों के पुनर्गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है। नए आदेश के तहत राज्य के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में नई समितियों के गठन की प्रक्रिया 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच पूरी की जाएगी।
वर्तमान में कार्यरत विद्यालय प्रबंधन समितियों का कार्यकाल 30 नवंबर 2026 तक रहेगा और नवगठित समितियां 01 दिसंबर 2026 से प्रभावी रूप से अपना कार्यभार संभालेंगी। प्रत्येक विद्यालय प्रबंधन समिति में कुल 15 सदस्य होंगे जिन्हें दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में 11 अभिभावक सदस्य होंगे, जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं। इस श्रेणी में प्रत्येक कक्षा का प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य है और कम से कम 50फीसदी महिला सदस्यों के साथ-साथ एससी, एसटी, ओबीसी और कमजोर वर्ग का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। दूसरी श्रेणी में 4 अन्य सदस्य होंगे जिनमें स्थानीय प्राधिकारी का एक निर्वाचित सदस्य, एक एएनएम, जिलाधिकारी द्वारा नामित एक लेखपाल और स्कूल के प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक (जो पदेन सदस्य सचिव होंगे) शामिल होंगे। समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन इन्हीं 11 अभिभावक सदस्यों में से किया जाएगा जिसमें कम से कम एक महिला का होना अनिवार्य है।
समिति का गठन पूर्णतः खुली बैठक में किया जाएगा, जिसके लिए कुल अभिभावकों में से कम से कम 50 फीसदी की उपस्थिति आवश्यक होगी। चयन की प्रक्रिया पहले सर्वसम्मति से करने का प्रयास किया जाएगा और सहमति न बनने की स्थिति में हाथ उठाकर मतदान कराया जाएगा। नवगठित समितियों को विद्यालय विकास योजना तैयार करने, वार्षिक कार्ययोजना बनाने, छात्र नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता, मध्याह्न भोजन, स्वच्छता व बाल सुरक्षा की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, समितियां आधारभूत सुविधाओं के विकास, वित्तीय अनुदानों और खर्चों की निगरानी तथा समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करेंगी।
समिति का एक बैंक खाता संचालित होगा जिसका संचालन अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। सभी भुगतान पीएफएमएस, एसएनए स्पर्श प्रणाली के अनुसार ऑनलाइन किए जाएंगे। समिति गठन के एक माह के भीतर सभी सदस्यों को आरटीई एक्ट-2009, एनईपी-2020, निपुण भारत मिशन, विद्यालय विकास योजना, वित्तीय प्रबंधन और बाल सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय, अभिभावकों और समुदाय के बीच की सबसे मजबूत कड़ी है। शासन के निर्देशानुसार तय समय-सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ खुली बैठक आयोजित कर नई समितियों का गठन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसमें अभिभावकों, विशेषकर महिलाओं और वंचित वर्गों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है कि वे पुनर्गठन की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से समय पर पूरा करें ताकि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर ढांचागत विकास और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन को और गति दी जा सके।



