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36 घंटे के भूखे प्यासे व्रत के बाद… जब रनियां के इस घाट पर दिखा ‘ईश्वरीय संकेत’! आस्था का सैलाब देख उड़ जाएंगे होश

आज सुबह की वो 15 मिनट: पानी में खड़ी माताओं की तपस्या देख विज्ञान भी हुआ फेल!

कानपुर देहात के रनियां से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसे जानने के बाद हर कोई दंग रह जाएगा! लोक आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा मंगलवार को किशरवल स्थित अमृत सरोवर पर उस वक्त चरम पर पहुँच गया, जब 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास तोड़ते हुए व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया।

हर साल की तरह इस बार भी रनियां में एक अलग ही ऊर्जा और भक्ति का माहौल था। खासकर प्राचीन पातालेश्वर मंदिर परिसर के पास के घाट पर, जब सैकड़ों महिलाएँ कमर तक पानी में खड़ी होकर संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अंतिम प्रार्थना कर रही थीं, तब आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग उस दृश्य को कैमरे में कैद करने को मजबूर हो गए।

सोमवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद, मंगलवार की सुबह सूर्योदय के समय व्रतियों ने अंतिम अर्घ्य दिया। इसके बाद ठेकुआ प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का कठोर व्रत समाप्त हुआ। इस दौरान महिलाओं द्वारा गाए जा रहे पारंपरिक छठ गीतों से पूरे औद्योगिक क्षेत्र रनियां में पूर्वांचल की झलक महसूस की गई। इस महापर्व को सफल बनाने में चेयरमैन प्रतिनिधि रामकिशोर दिवाकर, सोनू मिश्रा, राजीव ठाकुर, श्याम जी त्रिपाठी आदि ने भी सहयोग दिया।

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