कानपुर देहात: भोगनीपुर में 27 साल पुराने गोवध मामले के दोषियों को मिली सजा
समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई कार्यवाही।

कानपुर देहात के थाना भोगनीपुर अंतर्गत करीब सत्ताइस वर्ष पुराने गोवध निवारण अधिनियम के एक मामले में न्यायालय ने निर्णायक फैसला सुनाया है। पुलिस की प्रभावी पैरवी और ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई त्वरित कार्यवाही के चलते अभियुक्तों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई गई है। यह मामला 1998 का है, जिसमें पुलिस द्वारा निरंतर की गई कानूनी प्रक्रिया अब अंजाम तक पहुंची है।
गाय वध और चमड़ा तस्करी का था मामला
घटना 2 दिसंबर 1998 की है, जब ग्राम अमरौधा में गाय का वध कर उसके चमड़े का अवैध आयात-निर्यात करने की सूचना मिली थी। तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक पीके त्रिवेदी की बरामदगी रिपोर्ट के आधार पर थाना भोगनीपुर में कलीम, आफताब, असलम और अब्दुल रहीम के विरुद्ध गोवध निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा था।
कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की प्रभावी पैरवी
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य संकलन किया और गवाहों के बयान दर्ज किए। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में चल रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के माध्यम से भोगनीपुर पुलिस, कोर्ट पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने इस पुराने मामले को प्राथमिकता पर रखा। लगातार प्रभावी पैरवी और गवाहों की समयबद्ध पेशी के कारण अभियुक्तों का दोष सिद्ध होना संभव हो सका।
न्यायालय का फैसला और दण्ड
न्यायालय जेएम भोगनीपुर ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त असलम, कलीम और अब्दुल रहीम को गोवध का दोषी पाया। अदालत ने तीनों अभियुक्तों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 500-500 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को 15-15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। उल्लेखनीय है कि इस मामले के एक अन्य अभियुक्त आफताब ने पहले ही अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था।
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