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कानपुर देहात: संविलियन विद्यालय कन्या अफसरिया में भारी अनियमितता: बंद अलमारी में मिलीं किताबें, शिक्षकों की गुटबाजी पर भड़के बीएसए, पूरे स्टाफ को थमाया नोटिस

बच्चों से दूर रखी गई खेल सामग्री, आईसीटी लैब बंद, शून्य उपस्थिति और फर्जी नामांकन मिला 

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के दावों के बीच कानपुर देहात से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। राजपुर विकासखंड के संविलियन विद्यालय कन्या अफसरिया में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के औचक निरीक्षण के दौरान भारी अनियमितताएं, फर्जीवाड़ा और शिक्षकों की आपसी गुटबाजी का भंडाफोड़ हुआ है।

इस घोर लापरवाही को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने कड़ा रुख अपनाते हुए विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सत्येन्द्र कुमार समेत समस्त स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर अंतिम चेतावनी दी है। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण उपरांत उपलब्ध कराई गई निरीक्षण आख्या के आधार पर बीएसए ने बड़ी कार्यवाही की है।

सरकार द्वारा बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए लाखों रुपए की लागत से बनाई गई सुविधाएं सिर्फ कागजों और कमरों तक सीमित पाई गईं। प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा कंपोजिट ग्रांट का दुरुपयोग किया गया। विद्यालय में मौजूद आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास और एस्ट्रोनॉमी लैब पूरी तरह बंद पाई गईं। लर्निंग बाय डूइंग की प्रयोगशाला में केवल सामग्री को ठूंसकर रखा गया था बच्चों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा था।

सरकार द्वारा भेजी गई मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और खेलकूद सामग्रियां बच्चों में बांटने के बजाय अलमारियों में बंद रखी हुई थीं। निरीक्षण आख्या में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्कूल के भीतर चल रही शिक्षकों की आपसी लड़ाई को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार जूनियर स्तर पर तैनात दो शिक्षकों के बीच लंबे समय से चल रहे अंतर्द्वंद्व और विवाद के कारण पूरे स्कूल का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय एक-दूसरे पर दोषारोपण करने में व्यस्त हैं जिसका सीधा असर बच्चों के भविष्य और विद्यालय की उपस्थिति पर पड़ रहा है।

जांच के दौरान स्कूल में बच्चों के नामांकन को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा भी सामने आया है। प्रभारी प्रधानाध्यापक ने अपनी मनमानी चलाते हुए कई ऐसे बच्चों के नाम रजिस्टर में दर्ज कर रखे हैं जो कभी स्कूल आते ही नहीं हैं। जांच में पाया गया कि कई बच्चे जो वास्तव में दूसरे स्कूलों में पढ़ रहे हैं या अपनी बस्तियों में ही घूम रहे हैं उनका नाम भी कन्या अफसरिया विद्यालय के छात्र पंजिका में दर्ज है ताकि छात्र संख्या को कागजों पर ज्यादा दिखाया जा सके।

निरीक्षण के दिन स्कूल में छात्र उपस्थिति का स्तर बेहद शर्मनाक और चिंताजनक पाया गया। कुल नामांकित बच्चों के मुकाबले उंगलियों पर गिनने लायक छात्र ही स्कूल पहुंचे थे। कक्षा 1 में कुल 11 नामांकित छात्र हैं उपस्थित बच्चों की संख्या शून्य मिली। कक्षा 2 में कुल 13 नामांकित छात्र हैं मौके पर उपस्थित केवल 5 मिली। कक्षा 3 में कुल 31 नामांकित छात्र हैं मौके पर उपस्थित केवल 17 मिली। कक्षा 4 में कुल 20 नामांकित छात्र हैं मौके पर उपस्थित केवल 10 पाई गई। कक्षा 5 में कुल 24 नामांकित छात्र हैं मौके पर उपस्थित केवल 14 मिली। कक्षा 7 में कुल 33 नामांकित छात्र मौके पर उपस्थित केवल 7 थे। कक्षा 8 में कुल 41 नामांकित छात्र मौके पर उपस्थित केवल 12 थे।

बीएसए की सख्त चेतावनी

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस पूरे मामले को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन और घोर कदाचार माना है। उन्होंने आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित पूरा स्टाफ 30 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे तक सुसंगत साक्ष्यों सहित कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। समय पर जवाब न देने या संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा कर्मचारी नियमावली के तहत कठोर विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

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