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कानपुर: गंगा बैराज पर स्टंट किया तो खैर नहीं, नाबालिगों को गाड़ी दी तो नपेंगे माता-पिता, डीएम का कड़ा फरमान

सड़क हादसों पर ब्रेक लगाने को प्रशासन सख्त, घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले 'राहवीर' को मिलेंगे 25 हजार

कानपुर नगर। कानपुर नगर में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को रोकने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रशासनिक अमले ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने अभिभावकों को सख्त हिदायत देते हुए अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी हाल में बाइक या कार की चाबी न सौंपें। प्रशासन नाबालिग वाहन चालकों को लेकर इस समय बेहद गंभीर है और चालू वर्ष में अब तक ऐसे 12 मामलों में चालान की सख्त कार्रवाई भी की जा चुकी है। इसके साथ ही गंगा बैराज रोड पर जानलेवा स्टंट करने वाले रीलबाजों और बाइकर्स को चेतावनी देते हुए उन्होंने पुलिस को उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सीधे जेल भेजने जैसी प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की जान बचाना प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जिले के सबसे ज्यादा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिन्हित कर वहां महज 5 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंचने की मुकम्मल व्यवस्था की जाए। इन हाईवे रूटों पर पड़ने वाले सभी सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं को अपग्रेड किया जाएगा और एक जिला स्तरीय ‘मेडिकल एक्शन प्लान’ भी तैयार होगा। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री राहत जन आरोग्य योजना के तहत हाईवे के नजदीक स्थित शहर के 9 प्रमुख निजी अस्पतालों (वेदांता, डेल्टा, आशिर्य, चांदनी, उजाला सिग्नस कुलवंती, नारायणा, रामादेवी मेडिकल सेंटर, रामा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर और रामा हॉस्पिटल) को अधिकृत किया गया है। इन अस्पतालों में सड़क हादसे के शिकार पात्र घायलों का 1.5 लाख रुपये तक का पूरा इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाएगा।

हादसे के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ किसी भी घायल की जिंदगी के लिए सबसे कीमती होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने ‘राहवीर योजना’ का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा। इस योजना के तहत यदि कोई भी आम नागरिक किसी घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाता है, तो सरकार की तरफ से उसे 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। साथ ही पुलिस या अस्पताल प्रशासन उस मददगार से कोई अनावश्यक पूछताछ या पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित नहीं करेगा। बैठक के दौरान अप्रैल 2026 में हुई प्रवर्तन कार्रवाइयों का लेखा-जोखा भी सामने रखा गया। आंकड़े बताते हैं कि लापरवाही बरतने वालों पर प्रशासन का हंटर जमकर चला है। ट्रैफिक पुलिस ने बिना हेलमेट गाड़ी दौड़ाने वाले 24,885 लोगों पर जुर्माना ठोका, जबकि बिना सीट बेल्ट के 572, रेड लाइट जंप करने वाले 493, ड्रिंक एंड ड्राइव के 90 और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल पर बात करने वाले 175 लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया। इसके अलावा परिवहन विभाग ने ओवरलोडिंग और नशे में गाड़ी चलाने जैसी गंभीर लापरवाही को लेकर 38 ड्राइविंग लाइसेंस भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिए हैं।

 


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