कानपुर देहात: अनुदेशकों और शिक्षामित्रों के मानदेय भुगतान को लेकर बीएसए का बड़ा आदेश, 28 जुलाई तक बिल जमा करने के निर्देश
31 जुलाई से पहले बैंक खातों में मानदेय भेजने की तैयारी।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और ब्लॉक स्तर के संविदा कर्मियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय द्वारा एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत सभी कर्मियों के जुलाई 2026 के मानदेय बिल और उपस्थिति प्रमाण-पत्र तत्काल उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय के निर्देशों का हवाला देते हुए बीएसए ने स्पष्ट किया है कि समग्र शिक्षा योजना को अब एसएनए- स्पर्श 2 प्रणाली के माध्यम से संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इस नई व्यवस्था को लागू करने में लगभग दो महीने का समय लग सकता है जिससे आगामी दिनों में मानदेय भुगतान प्रभावित होने की आशंका है।
इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने जुलाई माह का वेतन और मानदेय भुगतान 31 जुलाई 2026 से पहले हर हाल में करने का आदेश दिया है।इसके सुचारू क्रियान्वयन के लिए कानपुर देहात के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे 28 जुलाई 2026 की दोपहर तक अपने-अपने विकासखंड के सभी कर्मियों (शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, कंप्यूटर ऑपरेटर, ब्लॉक समन्वयकों आदि) के मानदेय बिल और प्रमाणित उपस्थिति की हार्ड कॉपी तथा ईमेल के माध्यम से कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा कराएं।
लापरवाही बरतने पर कटेगा अगले महीने का वेतन
बीएसए ने अपने आदेश में सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि किसी भी ब्लॉक, कार्यालय या विद्यालय स्तर पर लापरवाही के कारण मानदेय बिल समय से जमा नहीं होते हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। इसके अलावा यदि 28 जुलाई से 31 जुलाई के बीच कोई कर्मचारी अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया जाता है तो नियमानुसार उसके अगले महीने के मानदेय से कटौती की जाएगी।
जून महीने के भुगतान का भी होगा समायोजन
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन विकासखंडों में जून 2026 के मानदेय बिलों का भुगतान संभावित उपस्थिति के आधार पर किया गया था, उनके वास्तविक डेटा का मिलान करते हुए जुलाई माह के बिलों में आवश्यक समायोजन किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी न हो।



