कानपुर देहात: ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर बीएसए ने जारी किया फरमान
भोगनीपुर फार्मेसी कॉलेज के 38 छात्र सरकारी अस्पतालों में ले रहे 45 दिवसीय बी.फार्मा की ट्रेनिंग।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। परिषदीय विद्यालयों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए बीएसए आशीष कुमार पाण्डेय ने शिक्षकों और छात्रों की डिजिटल अटेंडेंस (उपस्थिति) अनिवार्य कर दी है। उन्होंने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं हालांकि ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने में गुरुजी रुचि नहीं ले रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के मामले में कानपुर देहात जनपद की स्थिति दयनीय है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों और बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों में प्रयोग होने वाले 12 से अधिक रजिस्टरों को डिजिटल किया गया है। इसी आधार पर बीते वर्ष यह फरमान जारी किया गया था कि स्कूल खुलने पर बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी में कई तरह की तकनीकी समस्याएं आ रही हैं।
ग्रामीण परिवेश में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती है ऐसे में डिजिटल हाजिरी लगाना संभव नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों में प्रयोग होने वाली 12 पंजिकाओं के डिजिटाइजेशन की कवायद पिछले साल नए सत्र की शुरुआत के साथ की थी। इसके लिए लगभग सभी विद्यालयों में दो-दो टैबलेट भी उपलब्ध कराए गए थे किंतु शिक्षकों की भी डिजिटल उपस्थिति इसमें जुड़ी होने के कारण प्रदेश भर में काफी विरोध हुआ था। इसके बाद उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप पर इसे स्थगित कर दिया था।
बीएसए आशीष कुमार पाण्डेय का कहना है कि डिजिटल हाजिरी से विभाग के पास शिक्षकों और बच्चों की ऑनलाइन जानकारी होगी। हाजिरी के नाम पर शिक्षकों के उत्पीड़न की शिकायतें खत्म हो जाएगी। सही डाटा मिलने पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियां दूर करने में मदद मिलेंगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।



