कानपुर देहात में चेयरमैन और फौजी का जमीनी विवाद खत्म: रजिस्ट्री की गलती सुधरते ही हुआ समझौता, विरोधियों पर लगा छवि बिगाड़ने का आरोप
: शिवली कस्बे का बहुचर्चित मामला सुलझा, गाटा संख्या की त्रुटि दूर कर फौजी को मिला कब्जा, सांसद और अफसरों पर टिप्पणी को बताया निंदनीय।

कानपुर देहात: जनपद के कस्बा शिवली में चेयरमैन अवधेश शुक्ला और फौजी बलराम सिंह के बीच चल रहा बहुचर्चित जमीनी विवाद आखिरकार पूरी तरह से समाप्त हो गया है। तहसील रजिस्ट्रार कार्यालय में दोनों पक्षों की मौजूदगी में रजिस्ट्री की लिपकीय त्रुटि को सुधारा गया, जिसके बाद विवाद का पटाक्षेप हो गया।
इस मामले को लेकर बीते दिनों सोशल मीडिया पर चेयरमैन द्वारा फौजी की जमीन हड़पने का आरोप लगाकर तरह-तरह की खबरें वायरल की जा रही थीं, जिसमें उन्हें सांसद का करीबी बताते हुए जिला प्रशासन को भी निशाने पर लिया गया था। इसके बाद तहसील प्रशासन ने संबंधित जमीन को कुर्क कर पुलिस को रिसीवर बना दिया था और दोनों पक्षों के 9 लोगों पर पाबंदी की कार्रवाई की थी।
मामले की हकीकत तब सामने आई जब विक्रेता दिनेश सिंह और महेश सिंह ने बताया कि फौजी बलराम सिंह को बैनामा करते समय गाटा संख्या 819 की जगह गलती से 690 दर्ज हो गया था। इस मानवीय भूल को स्वीकार करते हुए शनिवार को तहसील रजिस्ट्रार ऑफिस में तितम्मा (संशोधन विलेख) की विधिक कार्रवाई कराई गई। इसके बाद फौजी बलराम सिंह को उनकी सही गाटा संख्या 819 में कब्जा दे दिया गया। फौजी बलराम सिंह ने भी स्वीकार किया कि त्रुटि सुधरने के बाद उन्हें तय स्थान पर कब्जा मिल गया है।
मामले के पटाक्षेप के बाद शिवली नगर पंचायत अध्यक्ष अवधेश कुमार शुक्ला ने एक वीडियो जारी कर विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर उनके पुत्र राघव और मित्र अनुराग वाजपेयी के नाम जमीन खरीदी गई थी, वह पूरी तरह वैध थी। राजनीतिक विरोधियों ने केवल उनकी छवि को धूमिल करने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस पूरे विवाद को हवा दी थी। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत जिले के सक्षम अधिकारियों और सांसद देवेंद्र सिंह भोले पर अमर्यादित टिप्पणियां की गईं, जो कि बेहद निंदनीय हैं।



