कानपुर देहात में साइबर ठगों का बड़ा दुस्साहस, अमराहट थाना प्रभारी का सीयूजी नंबर हैक कर भेजे फर्जी लिंक
थाना प्रभारी की फोटो लगाकर वॉट्सएप ग्रुपों में फैलाया जा रहा वायरस, पुलिस ने जारी किया अलर्ट

कानपुर देहात में साइबर अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अब इन शातिर ठगों ने आम लोगों के साथ-साथ सीधे पुलिस को ही अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। साइबर अपराधियों ने अमराहट थाने के थाना प्रभारी के आधिकारिक सीयूजी (CUG) नंबर को हैक कर लिया है। इस नंबर और थाना प्रभारी की फोटो का गलत इस्तेमाल करते हुए ठगों द्वारा विभिन्न वॉट्सएप ग्रुपों में फर्जी आरटीओ चालान डाउनलोड करने के संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं, जिससे लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सके। जैसे ही इस सुरक्षा चूक की भनक पुलिस को लगी, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया और तत्काल लोगों को सतर्क करने की कवायद शुरू कर दी गई।
थाना प्रभारी महेश कुमार ने की हैकिंग की पुष्टि, भूलकर भी लिंक न खोलने की दी सख्त हिदायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमराहट थाना प्रभारी महेश कुमार ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि उनका आधिकारिक सीयूजी नंबर हैक हो गया है और उसी नंबर के जरिए ग्रुप्स में फर्जी लिंक प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने जनता से बेहद भावुक और सख्त अपील करते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में उस लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई फाइल डाउनलोड करें। पुलिस ने तकनीकी तौर पर आगाह किया है कि ऐसे फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन की पूरी प्राइवेसी खत्म हो सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, ओटीपी और अन्य संवेदनशील डेटा सीधे साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंच सकता है, जिससे वे बैंक खातों को पूरी तरह साफ कर सकते हैं।
साइबर सेल जांच में जुटी, किसी भी अधिकारी के नंबर से आए लिंक की पहले करें पुष्टि
इस हाई-प्रोफाइल साइबर अटैक की सूचना तत्काल जिला साइबर थाने को दे दी गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से हैक हुए नंबर को दोबारा सुरक्षित (रिकवर) करने की कानूनी और तकनीकी कार्यवाही तेजी से की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस की टीमें यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस बड़े साइबर हमले के पीछे किस गैंग का हाथ है। कानपुर देहात पुलिस ने आमजन से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर कतई भरोसा न करें। यदि किसी बेहद परिचित व्यक्ति या सरकारी अधिकारी के नंबर से भी कोई ऐसा संदिग्ध लिंक आता है, तो उस पर क्लिक करने से पहले फोन या सीधे मिलकर उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य कर लें।
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