यूपी में पंचायत चुनाव टले: अब 2027 तक ग्राम प्रधान ही रहेंगे गांवों के ‘बॉस’, योगी सरकार का बड़ा फैसला
कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी मौजूदा ग्राम प्रधान ही संभालेंगे गांवों में प्रशासक की कमान।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव समय पर न होकर अब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की तैयारी है। इस लंबी देरी को देखते हुए सरकार ने गांवों के विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अंतरिम व्यवस्था को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत मौजूदा ग्राम प्रधान ही चुनाव होने तक गांवों के प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे। मुख्यमंत्री की हरी झंडी के बाद पंचायती राज विभाग द्वारा सोमवार शाम तक इसका आधिकारिक शासनादेश जारी होने की पूरी संभावना है।
प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिससे गांवों के संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ था। इस बार सरकार ने पुरानी परंपरा को बदलते हुए पहली बार ग्राम पंचायतों में “प्रशासक समिति” के गठन का निर्णय लिया है। अब तक कार्यकाल खत्म होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों और विकास कार्यों की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी मौजूदा जनप्रतिनिधियों को ही सौंपने का फैसला किया गया है ताकि पंचायत भवन, सड़क, पेयजल और मनरेगा जैसी जरूरी ग्रामीण योजनाओं पर कोई ब्रेक न लगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में करीब एक वर्ष या उससे अधिक की देरी होने की मुख्य वजह पंचायत मतदाता सूची का पूरी तरह तैयार न होना है, जो अब 10 जून 2026 को जारी होनी है। इसके अलावा हाईकोर्ट में लंबित प्रक्रियाएं और राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट भी इस देरी का बड़ा कारण बनी हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से कार्यवाहक अधिकार देने की मांग कर रहा था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद जहां एक ओर ग्राम प्रधानों ने राहत की सांस ली है, वहीं राजनीतिक गलियारों में यह साफ हो गया है कि अगले चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही संपन्न होंगे।
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