शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, 158 खंड शिक्षा अधिकारियों को मिला प्रमोशन, देखें पूरी सूची

राजेश कटियार, लखनऊ/ कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति किए हैं। शासन स्तर पर जारी आदेश के तहत राज्य के 158 खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रादेशिक शैक्षिक सेवा (पीईएस) समूह-ख संवर्ग में प्रोन्नत किया गया है। इस बड़ी पदोन्नति सूची में कानपुर देहात जनपद के एकमात्र खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार को भी स्थान मिला है, जिससे स्थानीय बेसिक शिक्षा विभाग में हर्ष का माहौल है।
वर्तमान में कानपुर देहात के विकासखंड मैथा में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार को पीईएस संवर्ग में पदोन्नति प्रदान करते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) फर्रुखाबाद में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर भेजा गया है।
कानपुर देहात डाइट को भी मिले दो नए वरिष्ठ प्रवक्ता
इस पदोन्नति प्रक्रिया के तहत कानपुर देहात के पुखरायां स्थित डाइट को भी दो नए वरिष्ठ प्रवक्ता मिले हैं। उन्नाव जनपद में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी जगदीश कुमार श्रीवास्तव और प्रयागराज जनपद में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार अवस्थी को पदोन्नत कर कानपुर देहात जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पुखरायां में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर नई तैनाती दी गई है।
लोक सेवा आयोग प्रयागराज की बैठक में लिया गया निर्णय
उत्तर प्रदेश शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-2 द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या 757/15-2-2026 के अनुसार, यह पदोन्नति लोक सेवा आयोग प्रयागराज में 16 एवं 17 अप्रैल 2026 को आयोजित विभागीय चयन समिति (डीपीसी) की बैठक में की गई संस्तुतियों के आधार पर स्वीकृत की गई है।
शासन ने पदोन्नति प्राप्त सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने नए तैनाती स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करें और कार्यभार ग्रहण प्रमाण-पत्र शासन व निदेशालय को उपलब्ध कराएं। इन अधिकारियों के नए पदों पर कार्यभार संभालने के संबंध में अलग से विस्तृत आदेश भी जारी किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता में होगा सुधार
इस बड़े पैमाने पर हुई पदोन्नति से बेसिक शिक्षा विभाग में ब्लॉक और जिला स्तर पर लंबे समय से रिक्त पड़े प्रशासनिक पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही नए खंड शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी तेजी आने की पूरी संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से स्कूलों के प्रशासनिक कामकाज, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की निगरानी और बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग लंबे समय से लंबित डीपीसी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्रयासरत था, और यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।



